चार घंटे के सांकेतिक प्रदर्शन के बाद रेसिडेंट डाक्टरों ने फिर काम संभाला 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में बुधवार सुबह नौ बजे से जूनियर डाक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। जूनियर डाक्टर, सीनियर रेसिडेंट और जूनियर रेसिडेंट के हड़ताल पर जाने की वजह से ओपीडी में मरीजों को इलाज मिलने में देरी हुई। सिर्फ इमरजेंसी वाले आपरेशन ही हो पाए।

भोपाल । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में बुधवार सुबह नौ बजे से जूनियर डाक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। जूनियर डाक्टर, सीनियर रेसिडेंट और जूनियर रेसिडेंट के हड़ताल पर जाने की वजह से ओपीडी में मरीजों को इलाज मिलने में देरी हुई। सिर्फ इमरजेंसी वाले आपरेशन ही हो पाए। एक बजे के बाद डाक्टर फिर काम पर लौट आए हैं। एम्स के रेसिडेंट डाक्टर्स दिल्ली में रेसिडेट डाक्टर्स के साथ पुलिस द्वारा की गई मारपीट और गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। एम्स के रेसिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के प्रेसीडेंट डा. श्रावण जेएस ने बताया कि चार घंटे के सांकेतिक प्रदर्शन के बाद रेसिडेंट डाक्टरों ने फिर काम संभाल लिया। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं में लगे डाक्टर हड़ताल पर नहीं थे। एम्स में करीब 450 रेजिटेंड डाक्टर हैं। इनमें आधे अवकाश पर हैं। बाकी आंदोलन में शामिल हुए। आरडीए ने एक दिन पहले कालेज प्रबंधन को सूचना दी थी कि वह बुधवार सुबह नौ से एक बजे के बीच हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।


यहां सेवाएं हुईं प्रभावित
ओपीडी : एम्स की ओपीडी में हर दिन करीब 1700 मरीज आते हैं। इन मरीजों को ओपीडी में पहले रेसिडेंट डाक्टर्स देखते हैं। इसके बाद उन्हें कंसल्टेंट्स (फैकल्टी) के पास भेजा जाता है। आंदोलन की वजह से मरीज सीधे कंसल्टेंट्स के पास पहुंचे, जिससे दिखाने में दो से तीन घंटे की देरी हुई।


आपरेशन थियेटर : आपरेशन के पहले मरीज की बेहोशी की जांच रेसिडेंट डाक्टर करते हैं। आपरेशन के ठीक पहले मरीज की फिटनेस देखने का काम भी वही करते हैं। ओटी में बड़े डाक्टरों की मदद रेसिडेंट डाक्टर करते हैं। उनकी हड़ताल की वजह से इन कामों में कठिनाई थी, इस कारण एक बजे तक सिर्फ इमरजेंसी आपरेशन ही हुए।


 सीटी स्कैन और एमआरआइ : एम्स में सीटी स्कैन, एमआरआइ जांच भी रेसिडेंट डाक्टर ही करते हैं। इसी तरह से रेडियोथैरेपी विभाग में कैंसर मरीजों की सिकाई लगभग पूरा काम सिर्फ रेसिडेंट डाक्टर करते हैं। बड़े डाक्टर सिर्फ निगरानी करते हैं।