झारखंड के चतरा जिले में सिमरिया के पास बीती देर शाम को रांची से दिल्ली जाते समय एयर एम्बुलेंस के क्रैश हो गई थी। जहां अब खुलासा हुआ है कि विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई है। राज्य सरकार के एक बड़े अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
By: Arvind Mishra
Feb 24, 20269:43 AM

रांची। स्टार समाचार वेब
झारखंड के चतरा जिले में सिमरिया के पास बीती देर शाम को रांची से दिल्ली जाते समय एयर एम्बुलेंस के क्रैश हो गई थी। जहां अब खुलासा हुआ है कि विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई है। राज्य सरकार के एक बड़े अधिकारी ने यह जानकारी दी है। दरअसल, रात हुए एयर एंबुलेंस हादसे में जान गंवाने वाले सभी सात लोगों के शव मंगलवार सुबह सदर अस्पताल पहुंचते ही पूरे परिसर में मातम छा गया। पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल टीम का गठन कर दिया गया है और प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी की मौजूदगी में सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। अस्पताल परिसर में मृतकों के परिजन के पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी पहुंचे हुए हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया और हर संभव सहायता का भरोसा दिया। हादसे में पायलट, सह-पायलट, चिकित्सक, मेडिकल कर्मी, मरीज और उसकी पत्नी सहित कुल सात लोगों की मौत हुई है।
भीषण आग में झुलस गए थे मरीज
चतरा के एसपी सुमित अग्रवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एयर एंबुलेंस सिमरिया के जंगल में गिरी। मृतकों में 40 वर्षीय मरीज संजय कुमार भी शामिल हैं, जो कुछ दिन पहले एक ढाबे में लगी भीषण आग में गंभीर रूप से झुलस गए थे। इलेक्ट्रिक बर्न की वजह से उनका 65 प्रतिशत शरीर जल गया था। उन्हें रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पिछले दस दिनों से उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया।
जिंदगी बचाने की कोशिश बनी आखिरी उड़ान
संजय कुमार पेशे से ढाबा चलाते थे और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए परिवार ने आर्थिक परेशानियों की परवाह किए बिना एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। रिश्तेदारों और परिचितों ने भी सहयोग किया ताकि उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। एयर एंबुलेंस बुक होने के बाद परिवार में उम्मीद जगी कि राजधानी में बेहतर इलाज से उनकी जान बच जाएगी।
जिंदगी की आखिरी उड़ान हुई साबित
संजय को एयर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। उनके साथ उनकी पत्नी और अन्य परिजन भी सवार हुए। सभी के मन में उम्मीद और दुआ थी, लेकिन यह उड़ान उनकी जिंदगी की आखिरी उड़ान साबित हुई। दिल्ली पहुंचने से पहले ही विमान चतरा के सिमरिया जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और जीवन बचाने की यह कोशिश एक बड़ी त्रासदी में बदल गई। इस हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। जो संजय रोज अपने ढाबे पर लोगों को खाना खिलाते थे, वे अब नियति के आगे हार गए। बेहतर इलाज की उम्मीद में भरी यह उड़ान पल भर में मातम में बदल गई।
उड़ान के आधे घंटे बाद ही विमान क्रैश
जानकारी के अनुसार, विमान ने शाम 7:07 बजे रांची से उड़ान भरी थी और रात करीब 10 बजे दिल्ली पहुंचने का अनुमान था। उड़ान भरने के लगभग आधे घंटे बाद ही विमान क्रैश हो गया। विमान में एक मरीज, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो सहायक, एक पायलट और एक सह-पायलट सवार थे।
पायलट ने मांगी थी रास्ता बदलने की अनुमति
पायलट का नाम विवेक विकास भगत और सह-पायलट का नाम सौराजदीप सिंह बताया गया है। उड़ान के दौरान खराब मौसम के कारण विमान ने रास्ता बदलने की अनुमति मांगी थी। कुछ समय तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क बना रहा, लेकिन बाद में अचानक संपर्क टूट गया। विमान न तो वाराणसी एटीसी से संपर्क कर पाया और न ही लखनऊ एटीसी से जुड़ सका। आखिरी बार इसका संपर्क कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुआ था। इसके बाद विमान से कोई संवाद स्थापित नहीं हो सका और रकुछ देर बाद सिमरिया के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इनकी गई जान
इस भीषण हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें मरीज संजय कुमार (40 वर्ष), उनकी पत्नी अर्चना देवी (35 वर्ष), भगीना ध्रुव कुमार (17 वर्ष), चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता, पारा मेडिकल कर्मी सचिन कुमार मिश्रा, पायलट विवेक विकास भगत और सह-पायलट सौराजदीप सिंह शामिल हैं।