भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में खुलासा: हार का मुंह देखना पड़ सकता है कई मंत्रियों को

बृजेंद्र सिंह यादव और सुरेश धाकड़ की भी चुनावी रिपोर्ट चिंताजनक बताई गई है। हरदा सीट से कृषि मंत्री कमल पटेल के पक्ष में वोटिंग फीडबैक सही नहीं मिला है।

भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में खुलासा: हार का मुंह देखना पड़ सकता है कई मंत्रियों को

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसकी सरकार बनेगी? यह तो आने वाले तीन दिसंबर को ही पता चलेगा। इस बार के चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि दोनों ही दल अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। इन सबके बीच भाजपा की टेंशन बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल काउंटिंग से पहले भाजपा द्वारा कराई गई आंतरिक सर्वे रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट को सही मानें तो कुछ मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। इस लिस्ट में मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया का नाम सबसे ऊपर है।

इसके अलावा बृजेंद्र सिंह यादव और सुरेश धाकड़ की भी चुनावी रिपोर्ट चिंताजनक बताई गई है। हरदा सीट से कृषि मंत्री कमल पटेल के पक्ष में वोटिंग फीडबैक सही नहीं मिला है। यदि चुनावी प्रचार के दौरान विरोध की बात की जाए तो मंत्री मोहन यादव, गौरीशंकर बिसेन, रामकिशोर कावरे, प्रेम सिंह पटेल, ऊषा ठाकुर, रामखेलावन पटेल, अरविंद सिंह भदौरिया भी सूची में शामिल हैं। इन सबके बावजूद भाजपा नेता दीपक विजयवर्गीय ने दावा किया कि बीजेपी के तमाम दिग्गज भारी बहुमत से जीत दर्ज कराएंगे। हालांकि इंटरनल रिपोर्ट पर कुछ भी कहने से भी कतराते नजर आए।

भाजपा की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने साधा निशाना
इधर भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट पर कांग्रेस ने निशाना साधा है। कांग्रेस मीडिया विभाग उपाध्यक्ष अब्बास हाफिज का दावा है कि इस बार के चुनाव में डबल इंजन की सरकार के खिलाफ गुस्सा फूटा है। महंगाई से लेकर बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर जनता ने बीजेपी के खिलाफ वोटिंग की है। लिहाजा आगामी तीन दिसंबर में प्रदेश में बीजेपी के दिग्गजों की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। कांग्रेस ने यह भी कहा कि वोटिंग को लेकर कांग्रेस की इंटरनल रिपोर्ट में सत्ता की चाबी कमलनाथ के हाथों में होगी। अब मध्य प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी यह 3 दिसंबर को मालूम हो जाएगा। फिलहाल कांग्रेस और बीजेपी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही है। यहां पर बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में शिवराज कैबिनेट के 13 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा था।