मध्यप्रदेश में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के होने वाली भस्म आरती में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए। आरती के बाद उन्होंने देहरी से दर्शन कर भगवान महाकाल को जल अर्पित किया। उन्होंने दो घंटे तक नंदी हाल में बैठकर भगवान महाकाल का जाप किया और प्रात:कालीन आरती में सहभागिता कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
By: Arvind Mishra
Feb 28, 20262:25 PM
उज्जैन। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के होने वाली भस्म आरती में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए। आरती के बाद उन्होंने देहरी से दर्शन कर भगवान महाकाल को जल अर्पित किया। उन्होंने दो घंटे तक नंदी हाल में बैठकर भगवान महाकाल का जाप किया और प्रात:कालीन आरती में सहभागिता कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दरअसल, पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ आज यानी शनिवार को बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन किए। यहां चांदी द्वार से उन्होंने बाबा महाकाल का पूजन-अर्चन किया और उसके बाद नंदीजी के कानों में अपनी मनोकामना भी कही। महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने बताया कि भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की प्रात:कालीन भस्म आरती में दर्शन लाभ लिया।

धार्मिक स्थलों का हो रहा रखरखाव
बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद धनखड़ ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भारतवर्ष में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ रहा है। यह बदलाव हमारी हजारों वर्ष पूर्व की मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान में धार्मिक स्थलों का रखरखाव हो रहा है और इसका विकास किया जा रहा है जो अत्यंत ही सराहनीय कदम है यहां के प्रशासन की सुगमता लग्नशीलता से मैं प्रभावित हुआ हूं। मंदिर में सभी के साथ समानता से व्यवहार किया जा रहा है।
किसान-सेना का देश के प्रति त्याग महान
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा- हम अहंकार, घृणा, बदले की भावना और ईर्ष्या से ऊपर उठें। जीवन में स्वस्थ और प्रसन्न रहें। मैंने देश की प्रगति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की है। मैं किसान परिवार से आता हूं। हमारे किसानों और सेना के जवानों का देश के प्रति त्याग अत्यंत महान है। हम उनके सदैव आभारी रहेंगे। मैं सभी के कल्याण की कामना करता हूं। इस दौरान मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल द्वारा जगदीप धनखड़ का स्वागत एवं सत्कार किया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया।