महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगम चुनावों में भाजपा गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई प्रमुख शहरों में जीत हासिल की है। यह जीत एकनाथ शिंदे और भाजपा गठबंधन की रणनीति का नतीजा है, जबकि ठाकरे बंधु के एक साथ आने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) अपना आखिरी किला नहीं बचा सकी।
By: Arvind Mishra
Jan 17, 202612:02 PM
मुंबई। स्टार समाचार वेब
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगम चुनावों में भाजपा गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई प्रमुख शहरों में जीत हासिल की है। यह जीत एकनाथ शिंदे और भाजपा गठबंधन की रणनीति का नतीजा है, जबकि ठाकरे बंधु के एक साथ आने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) अपना आखिरी किला नहीं बचा सकी। पुणे में भी भाजपा विजयी रही, जहां उसने शरद पवार और अजित पवार की जोड़ी को सियासी मात दी है। भाजपा मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सीएम देवेंद्र फणवीस की रणनीति ने विपक्षी गठबंधन के हर दांव को पूरी तरह फेल कर दिया है। यह जीत न केवल मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र में भाजपा के बढ़ते दबदबे का स्पष्ट संकेत है। दरअसल, देश के सबसे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया है। मुंबई में भाजपा ने 227 में से 89 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई।

भाजपा निकाय में सबसे बड़ी पार्टी
भाजपा नगर निकाय में पार्टी के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने का जश्न मना रही है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति के धुरंधर बन गए हैं। चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद, शनिवार को मुंबई के कई हिस्सों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को धुरंधर देवेंद्र बताते हुए पोस्टर लगाए गए।
तजिंदर सिंह ने लगवाया पोस्टर
भाजपा युवा मोर्चा मुंबई के अध्यक्ष तजिंदर सिंह तिवाना ने इस पोस्टर को मुंबई में लगवाया है। तजिंदर सिंह तिवाना खुद भी इन नगर निगम चुनावों में कॉपोर्रेटर चुने गए हैं। फडणवीस के नेतृत्व की तारीफ करने वाले बड़े-बड़े होर्डिंग्स पूरे शहर में दिखाई दिए, यह पोस्टर भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद पार्टी खेमे में जश्न के माहौल को दिखा रहे हैं।
भाजपा का वोट शेयर
चुनाव अयोग और बीएमसी द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने 89 सीटें जीतीं और 11,79,273 वोट हासिल किए, यह कुल डाले गए वोटों का 21.58 प्रतिशत है। सभी जीतने वाले उम्मीदवारों में, भाजपा का वोट शेयर 45.22 प्रतिशत रहा, जिससे यह नगर निकाय में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसके गठबंधन सहयोगी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने 2,73,326 वोटों के साथ 29 सीटें हासिल कीं। शिवसेना का कुल वोट शेयर का 5.00 प्रतिशत है।
शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें
वहीं, एमएनएस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं। यूबीटी के नेतृत्व वाली शिवसेना को 7,17,736 वोट मिले, यह कुल डाले गए वोटों का 13.13 प्रतिशत है। एमएनएस ने गठबंधन के खाते में 6 सीटें जोड़ीं, जिसमें 74,946 वोट और 1.37 प्रतिशत वोट शेयर मिला। आईएनसी ने 24 सीटें हासिल कीं, जिसमें 2,42,646 वोट मिले, जो कुल वोट शेयर का 4.44 प्रतिशत है।
ओवैसी की पार्टी भी निकली आगे
अन्य पार्टियों में, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 68,072 वोटों के साथ 8 सीटें जीतीं। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को 3 सीटें मिलीं, समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें जीतीं, और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने 1 सीट जीती। मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के जीतने वाले उम्मीदवारों को 26,07,612 वोट मिले। यह कुल डाले गए वोटों का 47.72 प्रतिशत है। चुनाव में कुल 54,64,412 वोट डाले गए, जबकि 11,677 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।