नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को जेन-जी आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई 2025 में हुए प्रदर्शनों के दौरान युवाओं की मौत की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है।
By: Arvind Mishra
Mar 28, 20269:52 AM
काठमांडू। स्टार समाचार वेब
नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को जेन-जी आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई 2025 में हुए प्रदर्शनों के दौरान युवाओं की मौत की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद नई सरकार ने कार्रवाई शुरू की है। दरअसलख् नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने हाल ही में पद की शपथ ली है। सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद हुई इस गिरफ्तारी ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। ओली के साथ उनके पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। काठमांडू वैली पुलिस के अनुसार, दोनों को सुबह गिरफ्तार किया गया और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कानून के तहत कार्रवाई
सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी बदले की भावना से नहीं, बल्कि कानून के तहत की जा रही है। वहीं, ओली ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
विरोध प्रदर्शन और भड़की थी हिंसा
पिछले साल सितंबर में नेपाल में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें जेन-जी विरोध प्रदर्शन कहा गया। ये प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गए और दो दिनों के भीतर 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा के बाद ओली सरकार पर गंभीर सवाल उठे और आखिरकार उनकी सरकार गिर गई। इन घटनाओं ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।
जांच के बाद हुई गिरफ्तारी
हाल ही में बनी उच्च स्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उस समय उच्च पदों पर बैठे लोगों ने हालात को संभालने में लापरवाही बरती। आयोग ने ओली और रमेश लेखक समेत कई अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की। रिपोर्ट में अधिकतम 10 साल की सजा की भी सिफारिश की गई थी, जिसके बाद नई सरकार ने इसे लागू करने का फैसला लिया।
अभी और होंगी गिरफ्तारियां
नए गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने कहा कि वादा तो वादा होता है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह कदम न्याय की दिशा में पहला कदम है और देश को नई दिशा देने की कोशिश है। सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा। जांच आयोग ने केवल ओली और रमेश लेखक ही नहीं, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें नेपाल पुलिस के तत्कालीन महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग का नाम भी शामिल है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।