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अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस: क्यों है ज़रूरी और क्या हैं चुनौतियाँ?

15 सितंबर को हर साल अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है. यह दिन लोकतंत्र के मूल्यों और सिद्धांतों को याद दिलाता है. जानें लोकतंत्र का महत्व, इसकी प्रमुख चुनौतियाँ और भारत का लोकतांत्रिक सफर.

By: Ajay Tiwari

Sep 13, 20255:41 PM

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अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस: क्यों है ज़रूरी और क्या हैं चुनौतियाँ?

15 सितंबर: अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

स्टार समाचार वेब. फीचर डेस्क

हर साल 15 सितंबर को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है. यह दिन हमें उन मूल्यों और सिद्धांतों की याद दिलाता है, जो एक स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज का आधार हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2007 में स्थापित यह दिवस दुनिया भर में लोकतंत्र को मजबूत करने और उसके महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

यह सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि यह इस बात पर चिंतन करने का अवसर है कि लोकतंत्र वास्तव में हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है. यह हमें उन अधिकारों और स्वतंत्रताओं की याद दिलाता है जो हमें लोकतंत्र देता है, जैसे कि बोलने की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और चुनाव में भाग लेने का अधिकार.

लोकतंत्र क्या है?

लोकतंत्र, जिसे "जनता का शासन" भी कहते हैं, एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें लोग सीधे या अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार में भाग लेते हैं. इसका मूल सिद्धांत यह है कि शक्ति जनता में निहित होती है. लोकतंत्र के कुछ महत्वपूर्ण स्तंभ हैं:

  1. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: यह लोकतंत्र की रीढ़ है, जहाँ नागरिक बिना किसी दबाव के अपने प्रतिनिधि चुन सकते हैं.

  2. कानून का शासन: सभी नागरिक, चाहे वे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, कानून के सामने समान हैं.

  3. मानवाधिकारों का सम्मान: लोकतंत्र मानवाधिकारों, जैसे जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता और समानता का सम्मान करता है.

  4. बहुलतावाद: समाज में विभिन्न विचारों, संस्कृतियों और धर्मों के सह-अस्तित्व को स्वीकार करता है.

लोकतंत्र का महत्व

  • नागरिकों को अधिकार और स्वतंत्रता: लोकतंत्र हर नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने, अपनी पसंद की सरकार चुनने और अपनी जिंदगी जीने की स्वतंत्रता देता है.

  • समावेशी विकास: यह सभी वर्गों और समुदायों को विकास की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देता है.

  • सरकार की जवाबदेही: लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है.

  • शांति और स्थिरता: लोकतांत्रिक देश आपस में कम लड़ते हैं और अपने नागरिकों के बीच शांति बनाए रखने का प्रयास करते हैं.

लोकतंत्र के सामने चुनौतियाँ

आज भी, दुनिया भर में लोकतंत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इनमें से कुछ प्रमुख हैं:

  1. भ्रष्टाचार: यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है, क्योंकि इससे जनता का विश्वास हिल जाता है.

  2. असमानता: आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं.

  3. गलत सूचना (Disinformation): सोशल मीडिया के युग में, गलत सूचनाएँ लोगों को गुमराह कर सकती हैं और चुनावों को प्रभावित कर सकती हैं.

  4. लोकतंत्र विरोधी ताकतों का उभार: कुछ देशों में अधिनायकवादी ताकतों का फिर से उभार लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन रहा है.

भारत और लोकतंत्र: एक अनूठा सफर

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. यहाँ लोकतंत्र सिर्फ एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है. 1947 में आजादी के बाद से, भारत ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए भी लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखा है. यहाँ की विविधता, विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का सह-अस्तित्व, भारतीय लोकतंत्र को और भी मजबूत बनाता है.

भारत में लोकतंत्र की जड़ें गहरी हैं, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए हमें लगातार प्रयास करने होंगे. यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने अधिकारों का उपयोग करें, अपने कर्तव्यों का पालन करें और लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ खड़े हों.

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक सतत यात्रा है. यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इसे मजबूत करें, इसकी रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करें. जब

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