आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार भारत की विकास दर 7.2% तक जा सकती है। जानें कैसे कमजोर रुपया, सस्ता सोना और EU व्यापार समझौता आपकी जेब पर असर डालेंगे।
By: Ajay Tiwari
Jan 29, 20263:33 PM
नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक लेकिन सतर्क रोडमैप तैयार किया है। जहाँ एक ओर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक कारकों के कारण महंगाई और व्यापारिक चुनौतियों का साया भी मंडरा रहा है।
सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि घरेलू मांग और बुनियादी ढांचे में निवेश के दम पर भारत अपनी रफ्तार बनाए रखने में सक्षम है।
सर्वेक्षण में महंगाई को लेकर दोतरफा तस्वीर दिखाई गई है:
चुनौतियां (इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन): रुपये की गिरती कीमत आयात को महंगा बना रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना, चांदी और तांबे की ऊंची कीमतें 'कोर इन्फ्लेशन' (Core Inflation) पर दबाव डाल सकती हैं।
राहत के संकेत: अच्छी फसल की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रसोई का बजट संतुलित रहने की उम्मीद है। सर्वे का मानना है कि महंगाई RBI के तय दायरे (2% - 6%) के भीतर ही रहेगी।
भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) मुक्त व्यापार समझौते के कारण बिजनेस जगत में हलचल है:
सस्ती होंगी लग्जरी कारें: यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर महज 10% पर आने की संभावना है। इससे टाटा और महिंद्रा जैसी दिग्गज घरेलू कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलेगी।
वाइन इंडस्ट्री पर दबाव: आयातित वाइन सस्ती होने से 'सुला विनयार्ड्स' जैसी भारतीय कंपनियों के मार्केट शेयर पर असर पड़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि विकास को गति देने के लिए RBI अगले सप्ताह ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो होम लोन और कार लोन की किस्तों में कमी आएगी, जो उपभोक्ताओं के लिए इस सीजन की बड़ी राहत होगी।
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