आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में संघ के 100 साल पूरे होने पर बड़े संकेत दिए। जानें 75 साल की आयु में रिटायरमेंट और राष्ट्र निर्माण पर उनके विचार।
By: Ajay Tiwari
Feb 08, 20264:31 PM
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष में मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम विषयों पर अपना नजरिया रखा। भागवत ने केवल संघ के 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला, बल्कि स्वयंसेवकों की भूमिका और व्यक्तिगत सेवानिवृत्ति जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने अपनी व्यक्तिगत भूमिका और आयु को लेकर हो रही चर्चाओं पर विराम लगाया। उन्होंने संकेत दिया कि संघ में अनुशासन और व्यवस्था सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष की आयु एक ऐसा पड़ाव है जहाँ व्यक्ति को सक्रिय दायित्वों से हटकर मार्गदर्शक की भूमिका में आना चाहिए। उनके इस बयान को संघ के भीतर भविष्य में होने वाले नेतृत्व परिवर्तन के संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे समाज को संगठित करना है। शताब्दी वर्ष के अवसर पर उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और सामाजिक समरसता के कार्य को गति दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का कार्य राजनीति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए है।
मुंबई के इस कार्यक्रम में भागवत ने 'स्व' (स्वतंत्रता और स्वदेशी) के विचार पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राम विकास के क्षेत्रों में चल रहे संघ के सेवा कार्यों की सराहना की और इसे आने वाले दशक का मुख्य एजेंडा बताया।