मध्य प्रदेश एसटीएफ ने 3200 करोड़ के फॉरेक्स घोटाले में ऋषिकेश राय को नोएडा से गिरफ्तार किया। दुबई में बैठे मास्टरमाइंड लविश चौधरी के प्रत्यर्पण की तैयारी।
By: Star News
Feb 13, 20264:43 PM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (MP STF) ने देश के सबसे बड़े फॉरेन एक्सचेंज (Forex) ट्रेडिंग घोटालों में से एक में बड़ी सफलता हासिल की है। एसटीएफ ने रैनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के संचालक और 30 हजार रुपये के इनामी आरोपित ऋषिकेश राय को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है। इस महाठगी का जाल मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में फैला हुआ था, जिसमें हजारों निवेशकों के करीब 3200 करोड़ रुपये हड़प लिए गए।
नोएडा के सेक्टर 77 से हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, ऋषिकेश राय लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस को उसके नोएडा में छिपे होने की गोपनीय सूचना मिली थी। सटीक रेकी और घेराबंदी के बाद एसटीएफ की टीम ने उसे सेक्टर 77, नोएडा से धर दबोचा। जांच में सामने आया है कि ठगी गई कुल राशि में से 2062 करोड़ रुपये अकेले ऋषिकेश की कंपनी 'रैनेट टेक्नोलॉजी' के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
दुबई से ऑपरेट हो रहा है गिरोह का सरगना
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का मास्टरमाइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी है। लविश वर्तमान में दुबई में बैठकर अपना नेटवर्क चला रहा है। लविश के खिलाफ पहले ही लुक आउट नोटिस जारी किया जा चुका है। भारत सरकार उसे दुबई से प्रत्यर्पित (Extradition) करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। एमपी एसटीएफ ने लविश चौधरी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। इस मामले में अब तक कुल 16 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
ठगी का तरीका: 8% रिटर्न का झांसा और फर्जी ऐप्स
लविश और उसके एजेंटों ने निवेशकों को फंसाने के लिए एक सुनियोजित जाल बुना था। एजेंटों के माध्यम से लोगों को निवेश पर 6 से 8 प्रतिशत प्रतिमाह रिटर्न देने का लालच दिया जाता था। गिरोह ने यॉर्कर कैपिटल (Yorker Capital), यार्कर एफएक्स (Yorker FX) और बाटब्रो (BotBro) जैसी कई अनरजिस्टर्ड (Unregistered) कंपनियों के नाम पर निवेश कराया। पीड़ितों को एक मोबाइल ऐप या पोर्टल पर उनके निवेश की राशि फर्जी तरीके से बढ़ती हुई दिखाई जाती थी, जिससे उनका भरोसा जीत लिया जाता था। इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ जब इंदौर के एक पीड़ित ने 18 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एसटीएफ ने जांच की कड़ियां जोड़ीं।