प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। अपमान का आरोप लगा शंकराचार्य धरने पर बैठे।
By: Ajay Tiwari
Jan 18, 20265:02 PM
प्रयागराज: स्टार समाचार वेब
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम नगरी प्रयागराज में भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई। रविवार को जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी से संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें सुरक्षा और भीड़ का हवाला देकर रोक दिया। इस दौरान पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच हुई धक्का-मुक्की ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद शंकराचार्य अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं।

विवाद उस समय शुरू हुआ जब पुलिस ने अत्यधिक भीड़ को देखते हुए शंकराचार्य की पालकी को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें पैदल संगम जाने का सुझाव दिया। शंकराचार्य के शिष्यों ने इसे परंपरा और प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया और आगे बढ़ने की कोशिश की। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और पुलिस व शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया और एक साधु के साथ मारपीट भी की।
अफरा-तफरी के बीच पुलिस शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से करीब 1 किलोमीटर दूर ले गई। इस खींचतान में पालकी का 'क्षत्रप' (छत्र) भी टूट गया। अपमान और अव्यवस्था से नाराज शंकराचार्य ने संगम में स्नान नहीं किया और वापस अपने शिविर लौट आए। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक उन्हें ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाया जाएगा, वे गंगा स्नान नहीं करेंगे।
अपने शिविर में धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस घटना को सरकारी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, "यह सरकार के इशारे पर हो रहा है क्योंकि वे हमसे नाराज हैं। महाकुंभ की अव्यवस्थाओं पर मेरे बयानों का बदला लिया जा रहा है।" उन्होंने अधिकारियों पर संतों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया और कहा कि वे हार नहीं मानेंगे और उचित सम्मान मिलने पर ही स्नान करेंगे।
दूसरी ओर, प्रयागराज के जिलाधिकारी (DM) मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि शंकराचार्य बिना पूर्व अनुमति के पालकी के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे। उस समय संगम पर करोड़ों की भीड़ थी, ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से उन्हें पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। प्रशासन का आरोप है कि समर्थकों ने बैरियर तोड़े और पुलिस के साथ अभद्रता की। फिलहाल मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
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इस हंगामे के बीच मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान जारी है। प्रशासन के अनुसार अब तक लगभग 3 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं और यह आंकड़ा 4 करोड़ तक पहुँचने की उम्मीद है। पूरे मेला क्षेत्र में AI, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है, लेकिन शंकराचार्य के साथ हुई इस घटना ने मेले की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।