मार्केट रेगुलेटर SEBI ने स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर को क्लाइंट फंड के दुरुपयोग, मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग और सेटलमेंट में देरी के कारण 15 दिसंबर 2025 से 7 दिनों के लिए नया क्लाइंट जोड़ने से प्रतिबंधित किया। पढ़ें पूरी खबर।
By: Ajay Tiwari
Nov 29, 20254:32 PM
बिजनेस डेस्क. स्टार समाचार वेब
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने दिग्गज स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर (Prabhudas Lilladher) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। कंपनी को 15 दिसंबर 2025 से 7 दिनों की अवधि के लिए कोई भी नया क्लाइंट जोड़ने या नया असाइनमेंट लेने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। सेबी के चीफ जनरल मैनेजर एन मुरुगन ने जारी अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया, "प्रभुदास लीलाधर को 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) से 7 दिनों की अवधि के लिए स्टॉक ब्रोकर के रूप में कोई नया क्लाइंट, नया कॉन्ट्रैक्ट या नई स्कीम शुरू करने से प्रतिबंधित किया जाता है।"
सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) द्वारा 1 अप्रैल 2021 से 31 अक्टूबर 2022 तक की गई संयुक्त जांच में ब्रोकर के संचालन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इनमें सबसे गंभीर चूक क्लाइंट फंड्स के दुरुपयोग से जुड़ी थी।
प्रमुख उल्लंघन...
क्लाइंट फंड्स का दुरुपयोग: जुलाई 2021 में तीन अलग-अलग तारीखों पर क्लाइंट खातों में कुल लगभग ₹2.70 करोड़ की कमी पाई गई। सेबी ने इसे क्लाइंट फंड्स की "सीधा-सीधा निकासी" माना, जिसके लिए कोई वैध स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
निष्क्रिय खातों का निपटान न करना: 1,283 निष्क्रिय खातों (तिमाही आधार पर), 677 खातों (मासिक आधार पर), और कुछ सक्रिय खातों में भी करोड़ों रुपये का निपटान निर्धारित समय सीमा में नहीं किया गया। निष्क्रिय क्लाइंट्स के फंड्स समय पर नहीं लौटाए गए।
मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग: कई क्लाइंट्स के पीक मार्जिन और एंड-ऑफ-डे मार्जिन गलत तरीके से रिपोर्ट किए गए। एक मामले में ₹55.46 लाख की पीक मार्जिन शॉर्ट कलेक्शन भी सामने आई।
जुर्माना क्लाइंट्स पर डालना: एक्सचेंज द्वारा लगाए गए जुर्माने को ब्रोकर ने क्लाइंट्स पर स्थानांतरित कर दिया और बाद में उन्हें रिफंड नहीं किया।
सुरक्षा जमा का गलत प्रबंधन: पूरी पेमेंट वाले क्लाइंट्स की सिक्योरिटीज को अनुचित रूप से क्लाइंट अनपेड सिक्योरिटीज अकाउंट में पार्क किया गया।
अन्य प्रक्रियात्मक चूक: कई मामलों में नियमों से ज्यादा ब्रोकरेज वसूला गया, और केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) में क्लाइंट डेटा को अपलोड करने में भी देरी की गई।
प्रभुदास लीलाधर ने इन चूकों को "तकनीकी या सॉफ्टवेयर/क्लर्कियल गलतियां" बताया और तर्क दिया कि प्रभावित राशि कुल व्यापार के मुकाबले बहुत कम थी। सेबी ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। रेगुलेटर ने कहा, "क्लाइंट फंड्स का अलग रखना और उनकी सुरक्षा सबसे बुनियादी नियामकीय जिम्मेदारी है। रकम छोटी होने या बाद में सुधार कर लेने से यह जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।" हालांकि, सेबी ने यह स्वीकार किया कि कंपनी ने बाद में कई सुधारात्मक कदम उठाए और कुछ रिफंड भी किए, लेकिन बार-बार हो रही चूक की गंभीरता को देखते हुए निवेशकों के हित में यह अस्थायी प्रतिबंध लगाना आवश्यक था। यह कार्रवाई अनुशासनात्मक है और इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकना है।