×

गुजरात... अलकायदा के तीन बंगाली आतंकवादियों को अंतिम सांस तक कैद

अहमदाबाद एटीएस ने दो साल पहले राजकोट के सोनी बाजार से तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। तीनों आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। तीनों के तार आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े थे और उनके राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भी शामिल होने के संकेत मिले थे।

By: Arvind Mishra

Oct 01, 20252:54 PM

view19

view0

गुजरात... अलकायदा के तीन बंगाली आतंकवादियों को अंतिम सांस तक कैद

राजकोट में पकड़े गए तीनों आतंकी।

  • गुजरात की अदालत ने सुनाई सजा, संगठन में करते थे युवाओं की भर्ती
  • तीनों पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे, आतंकी संगठन का प्रचार कर रहे थे
  • राजकोट। स्टार समाचार वेब

अहमदाबाद एटीएस ने दो साल पहले राजकोट के सोनी बाजार से तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। तीनों आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। तीनों के तार आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े थे और उनके राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भी शामिल होने के संकेत मिले थे। वहीं, अब अदालत ने तीनों आतंकियों को अंतिम सांस तक कैद की सजा सुनाई है। अहमदाबाद एटीएस का शक अदालत में सच साबित हुआ। राजकोट की स्थानीय आदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा दी है। तीनों आतंकी मूल रूप से प. बंगाल के रहने वाले हैं।

पुलिस को मिले सबूत

दो साल पहले गुजरात एटीएस को खुफिया जानकारी के आधार पर पता चला था कि पश्चिम बंगाल के तीन आतंकी राजकोट की सोनी बाजार में मौजूद हैं। तीनों मजदूरी की आड़ में खूंखार आतंकी संगठन अल-कायदा का प्रचार कर रहे थे। सूचना मिलते ही एटीएस ने 31 जुलाई 2023 को सोनी बाजार में छापेमारी की और राजकोट रेलवे स्टेशन से तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट में साबित हुआ गुनाह

तीनों आतंकियों की पहचान अमन सिराज मलिक, अब्दुल शकुल अली शेख और शफनवाज अबुशाहिद के रूप में हुई। छापेमारी के दौरान पुलिस को पिस्तौल, कारतूस समेत कई सबूत मिले। अमन सिराज के फोन में राहे-ए-हिदायत नामक ग्रुप मिला, जिसमें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां शामिल थीं।

उम्रकैद और 10 हजार का जुर्माना

पुलिस ने तीनों आतंकियों को जेल भेजकर जांच पूरी की और राजकोट की अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान साफ हो गया कि तीनों आरोपी व्हाट्सएप चैटिंग के जरिए कई मुस्लिमों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए भड़काने की कोशिश करते थे। साथ ही उन्हें संगठन में शामिल करने का काम कर रहे थे। 2 साल के ट्रायल के बाद कोर्ट ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। इसके साथ ही अदालत ने तीनों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

COMMENTS (0)

RELATED POST

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हर स्कूल में मुफ्त सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य, अलग टॉयलेट न होने पर रद्द होगी मान्यता

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हर स्कूल में मुफ्त सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य, अलग टॉयलेट न होने पर रद्द होगी मान्यता

उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश के सभी स्कूलों को छात्राओं के लिए मुफ्त सैनेटरी पैड और अलग वॉशरूम अनिवार्य कर दिया है। मेन्स्ट्रुयल हाइजीन पॉलिसी लागू करने के निर्देश।

Loading...

Jan 30, 20265:14 PM

डरने की जरूरत नहीं! भारत में निपाह वायरस के दो संक्रमित मिले 

डरने की जरूरत नहीं! भारत में निपाह वायरस के दो संक्रमित मिले 

भारत में निपाह वायरस के दो संक्रमित सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आज यानी शुक्रवार को कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, भारत में निपाह वायरस फैलने का खतरा कम है।

Loading...

Jan 30, 20262:51 PM

राजस्थान: छह वाहनों की टक्कर... तीन की मौत.. जाम में फंसे लाखों लोग

राजस्थान: छह वाहनों की टक्कर... तीन की मौत.. जाम में फंसे लाखों लोग

राजस्थान के भीलवाड़ा में घने कोहरे के कारण भीषण सड़क हादसा हो गया। भीलवाड़ा के पास नेशनल हाईवे-58 पर कम विजिबिलिटी के कारण छह वाहन आपस में टकरा गए, जिससे इस हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

Loading...

Jan 30, 20262:02 PM

गाड़ी घर पर और कट गया टोल... एनएचआई ने लौटाए 17.6 लाख

गाड़ी घर पर और कट गया टोल... एनएचआई ने लौटाए 17.6 लाख

एनएचआई ने स्वीकार किया है कि 2025 के दौरान 18 लाख मामलों में गलत तरीके से टोल वसूला गया। हालांकि बाद में लोगों का पैसा लौटाना पड़ा। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त 18 लाल मामलों में से हर तीसरे मामले में गाड़ी टोल प्लाजा तक पहुंची ही नहीं थी, फिर भी सिस्टम ने जेब काट ली।

Loading...

Jan 30, 202612:45 PM

कुष्ठ रोग दिवस आज: इलाज आसान, असली चुनौती कलंक मिटाना 

कुष्ठ रोग दिवस आज: इलाज आसान, असली चुनौती कलंक मिटाना 

हर साल 30 जनवरी को विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है। भारत में इस दिन को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के साथ जोड़कर विशेष रूप से याद किया जाता है, क्योंकि गांधीजी ने कुष्ठ रोगियों के साथ रहकर उनके दर्द को समझा और समाज में उनके प्रति सम्मान की मिसाल दी।

Loading...

Jan 30, 202612:05 PM