भोपाल के खेड़ापति हनुमान मंदिर, इंदौर के पितरेश्वर और रणजीत हनुमान, उज्जैन के गेबी हनुमान, जबलपुर के अर्जी वाले हनुमान और ग्वालियर के मंशापूर्ण हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। जगह-जगह शोभायात्राएं, भंडारे और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
By: Arvind Mishra
Apr 02, 202610:26 AM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
आज यानी गुरुवार को प्रदेशभर में धूम-धाम से हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। जगह-जगह शोभायात्राएं, भंडारे और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। भोपाल के खेड़ापति हनुमान मंदिर, इंदौर के पितरेश्वर और रणजीत हनुमान, उज्जैन के गेबी हनुमान, जबलपुर के अर्जी वाले हनुमान और ग्वालियर के मंशापूर्ण हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भोपाल में जय मां भवानी हिंदू संगठन की हिंदू एकता शोभायात्रा निकाली जा रही है, जो कालीघाट मंदिर से बैरसिया रोड तक जाएगी। यात्रा में 15 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और झांकियां आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं बजरंग दल की वीर बजरंगी गदा यात्रा शाम 4:30 बजे छोला रोड से निकलेगी।
प्रयागराज: श्री बड़े हनुमान मंदिर में लगा विशेष छप्पन भोग

इधर, उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में गुरुवार को हनुमान जयंती के अवसर पर संगम स्थित श्री बड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है पूरा परिसर जगमग नजर आ रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा, जहां लोग भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। वहीं श्री बड़े हनुमान जी के लिए विशेष छप्पन भोग तैयार किया गया है और शाम को भजन संध्या का आयोजन किया गया है। इस शुभ अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। फूलों और आकर्षक सजावट से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आ रहा है। सुबह मंदिर में विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
भोपाल: खेड़ापति हनुमान मंदिर

करोंद स्थित 45 साल पुराने खेड़ापति हनुमान मंदिर की विशेषता यह है कि भूतल पर एक मनोकामना शिला (इच्छा-पुकारने का पत्थर) है, जहां भक्त अपनी इच्छाएं लिखते हैं। यहां आज भंडारा, अखंड रामायण पथ (निरंतर जप) और सुबह, शाम आरती होगी। यहां खेड़ापति लोक भी बनाया जाना है।
इंदौर: पितरेश्वर हनुमान मंदिर
शहर का प्रमुख आकर्षण है। बिजासन रोड पर पितृ पर्वत स्थित यह मंदिर दूर से दिखाई देता है। यहां अष्टधातु की बैठी हुई हनुमान प्रतिमा है, जो देश की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में मानी जाती है (करीब 72-108 फीट, वजन 108 टन)। यह पितर दोष निवारण और पितरों की शांति के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर शांत वातावरण और पर्यटन स्थल के रूप में भी लोकप्रिय है।
इंदौर: रणजीत हनुमान मंदिर
इंदौर के फूटी कोठी रोड गुमास्ता नगर में यह प्राचीन और चमत्कारी मंदिर विजय और संकट मोचन के लिए जाना जाता है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा ढाल और तलवार के साथ युद्ध मुद्रा (रणजीत रूप) में है। अहिरावण उनके पैरों में है। यह दुनिया का इकलौता मंदिर माना जाता है जहां हनुमान जी इस रूप में विराजमान हैं। 1907 के आसपास स्थापित यह मंदिर परीक्षा, मुकदमा या चुनौती से पहले आशीर्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
जबलपुर: अर्जी वाले हनुमान

जबलपुर के ग्वारीघाट स्थित 100 वर्ष पुराने अर्जी वाले हनुमान मंदिर में आसपास के जिलों से श्रद्धालु आते हैं। भक्त अपनी मन्नतें नारियल में बांधकर लटकाते हैं। यहां साल में एक बार मिलने वाले बाल रूप के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं।
ग्वालियर: मंशापूर्ण हनुमान
ग्वालियर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे 300 साल पुराने मंशापूर्ण हनुमान मंदिर में मान्यता है कि यहां मांगी हर मनोकामना पूरी होती है। यहां 26 साल से अखंड रामायण पाठ चल रहा है। आज दिनभर भक्तों की भीड़ रहेगी। हनुमान जन्म के बाद चोला चढ़ाकर पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन होंगे। 56 भोग लगाया जाएगा।
उज्जैन: गेबी हनुमान मंदिर
उज्जैन के ढाबा रोड स्थित गेबी हनुमान की मूर्ति चमत्कारिक मानी जाती है। यहां हनुमानजी का शृंगार सिंदूर की जगह हिंगलू (लाल रंग) और चमेली के तेल से होता है। गुड़-चना चढ़ाने की मान्यता है। काला धागा हनुमान जी को स्पर्श कर दिया जाता है, जिससे बुरी बला से मुक्ति और अस्वस्थ लोगों को लाभ मिलता है।
भिंड: दंदरौआ सरकार
भिंड जिले का डॉक्टर हनुमान मंदिर, जिसे दंदरौआ सरकार धाम कहा जाता है। यहां हनुमानजी को डॉक्टर रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां आने से गंभीर बीमारी में भी राहत मिलती है। दंदरौआ धाम में चोला शृंगार, भजन-पूजन और भंडारे होते हैं। 24 घंटे में 1 से 1.5 लाख श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
सागर: परेड वाले हनुमानजी
सागर के छावनी इलाके में परेड मंदिर है। यहां मूंछों वाले हनुमान विराजमान हैं। माना जाता है कि यहां हनुमान सैनिक रूप में हैं। कहा जाता है कि एक सैनिक, जो हनुमान भक्त था, परेड छोड़कर मंदिर आ गया। तभी कर्नल ने हाजिरी लगाई और हनुमान ने सैनिक रूप में हाजिरी दी।