महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दलों ने बड़ी राजनीतिक बढ़त बना ली है। भाजपा और महायुति गठबंधन के सहयोगियों ने 68 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। इस सियासी घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।
By: Arvind Mishra
Jan 03, 202612:36 PM
मुंबई। स्टार समाचार वेब
महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दलों ने बड़ी राजनीतिक बढ़त बना ली है। भाजपा और महायुति गठबंधन के सहयोगियों ने 68 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। इस सियासी घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। जहां सत्तापक्ष इसे अपनी संगठनात्मक मजबूती और जनाधार का प्रमाण बता रहा है। वहीं विपक्ष ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन्हीं सवालों को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी निकायों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। दरअसल, महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले महाराष्ट्र नगर निकाय और बीएमसी के चुनाव से पहले भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति ने बड़ी बढ़त बना ली है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख के बाद विभिन्न नगर निकायों में महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए।
भाजपा का दिखा दबदबा
इन 68 सीटों में से भाजपा को 44 सीटें, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 22 सीटें और अजित पवार की एनसीपी को 2 सीटें मिली हैं। सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में दर्ज हुई। इसके अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवाड, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर से भी सीटें महायुति के खाते में गईं।
दावा-भाजपा का होगा महापौर
पुणे में वार्ड-35 से भाजपा उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इसे भाजपा के कामकाज पर जनता के भरोसे का परिणाम बताते हुए दावा किया कि पुणे का अगला महापौर भाजपा का होगा। मोहोल ने कहा-हमारा लक्ष्य 125 सीटें जीतना है। इनमें से दो सीटें निर्विरोध जीती जा चुकी हैं, अब 123 सीटें शेष हैं।
उद्धव गुट ने खोला मोर्चा
भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा-इन घटनाक्रमों से राज्य भर के शहरी नगर निकायों में पार्टी की बढ़ती पकड़ का पता चलता है। पार्टी नेताओं ने इस रुझान का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता और राज्य इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा निर्देशित चुनावी रणनीति को दिया। हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को ईडी-सीबीआई की धमकी या सौदेबाजी के जरिए नाम वापस लेने पर मजबूर किया गया।

रिश्वत देकर किया समझौता
शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए। प्रियंका ने मुंबई में पत्रकारों से कहा-लोकतंत्र को खत्म करने का यह एक ऐसा तरीका है जिसमें विपक्षी उम्मीदवार ईडी और सीबीआई की धमकियों से डराकर या रिश्वत देकर उनसे समझौता कर लेते हैं। वे अपनी जीत खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और यह शर्म की बात है कि चुनाव आयोग इस पर चुप्पी साधे हुए है।