पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए भारत चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
By: Arvind Mishra
Feb 04, 20262:38 PM

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए भारत चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुनवाई के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने कोर्ट में एसआईआर को लेकर कहा कि न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है। वहीं याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा- पश्चिम बंगाल राज्य ने भी अपने अधिकार से याचिका दायर की है। इस न्यायालय के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में से एक सिब्बल उपस्थित हैं। 19 जनवरी को श्री सिबल ने राज्य की प्रक्रियात्मक कठिनाइयों और पश्चिम बंगाल के वास्तविक निवासियों को बाहर किए जाने की राज्य की वास्तविक आशंकाओं को स्पष्ट किया।
मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं...
ममता बनर्जी ने कोर्ट से बोलने की अनुमति मांगते हुए कहा कि मैं समझा सकती हूं क्योंकि मैं उस राज्य से हूं। इस पर सीजेआई ने कहा- इसमें कोई शक नहीं कि आप वहीं से हैं। इस पर ममता ने कहा- मुझे बोलने की इजाजत देने के लिए बेंच का धन्यवाद। सीएम ने कहा- मैं आपकी कृपा से यहां हूं। सभी न्यायाधीशों को मेरा प्रणाम। बहुत-बहुत धन्यवाद। विरोधी वकीलों को भी मेरा विनम्र प्रणाम। समस्या यह है कि जब सब कुछ खत्म हो जाता है, जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय बंद दरवाजे के पीछे रो रहा होता है। तब हमें लगता है कि हमें कहीं न्याय नहीं मिलेगा। मैंने चुनाव आयोग को पत्र लिखे हैं। मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, लेकिन मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं। मैं एक आम इंसान हूं।
ममता ने कहा-व्हाट्सऐप आयोग
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग को व्हाट्सऐप आयोग कहते हुए कहा- चुनाव आयोग माफ कीजिए, व्हाट्सऐप आयोग यह सब कर रहा है। लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। ममता की याचिका पर कोर्ट ने आयोग को नोटिस जारी किया है जिस पर ईसीआई सोमवार को जवाब दाखिल करेगा। पश्चिम बंगाल सरकार डेप्यूट करने के लिए उपलब्ध क्लास 2 अधिकारियों की लिस्ट देगी।
सरकार क्लास-2 अधिकारियों की दे सूची
सीजेआई ने कहा- पश्चिम बंगाल सरकार उन एसडीएम और क्लास-2 अधिकारियों की सूची दे, जिन्हें प्रतिनियुक्त किया जा सकता है। अगर अधिकारी उपलब्ध हैं, तो शायद माइक्रो आब्जर्वर्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता, प्रसिद्ध लेखक को भी नोटिस जारी किया गया है, कृपया इस तरह की चीजें देखिए। हर राज्य में कुछ नए मुद्दे होते हैं।
ममता ने रखी मिसमैच वाली दलील
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने टैगोर का उद्धरण दिया। सीजेआई ने कहा- सैद्धांतिक रूप से अगर ऐसा हो रहा है कि रॉय, दत्ता, गांगुली आदि के नाम अलग-अलग तरह से लिखे जा रहे हैं, तो हम यह भी नहीं जानते कि आजकल टैगोर कैसे लिखा जा रहा है-कुछ लोग ए लगाते हैं, कुछ नहीं। ममता बनर्जी ने कहा- अगर आप अनुमति दें तो मैं प्रमुख बंगाली अखबारों में छपी कुछ तस्वीरें दिखा सकती हूं। मिस मैच को मिसकैच किया जा रहा है। अगर बेटी शादी के बाद ससुराल जाती है और पति का उपनाम इस्तेमाल करती है, तो उसे भी मिसमैच दिखाया जा रहा है। बेटी के ससुराल शिफ्ट होने पर भी नाम मिसमैच बताकर हटाया जा रहा है। काम के लिए लोग पता बदलते हैं, तो उसे भी लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी बताकर नाम हटाया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया डिस्क्रेपेंसी मैपिंग है। बंगाल के लोग बहुत खुश थे कि इस अदालत ने आधार कार्ड, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और सरकारी आवास कार्ड स्वीकार करने का आदेश दिया, लेकिन चुनाव से ठीक पहले सिर्फ बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा है। 24 साल बाद इतनी जल्दबाजी क्यों, जो काम दो साल में होना था, उसे चार महीने में क्यों किया जा रहा है। फसल कटाई के मौसम में, पूजा के समय-जब लोग शहर में नहीं थे,तब नोटिस जारी कर दिए गए।