कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर संघ पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरएसएस की तुलना शैतान से की और भाजपा को शैतान की परछाई बताया है। साथ ही, उन्होंने संगठन पर फाइनेंशियल गड़बड़ियों का आरोप लगाया और इसके लीगल स्टेटस पर सवाल भी उठाए।
By: Arvind Mishra
Feb 16, 202610:12 AM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर संघ पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरएसएस की तुलना शैतान से की और भाजपा को शैतान की परछाई बताया है। साथ ही, उन्होंने संगठन पर फाइनेंशियल गड़बड़ियों का आरोप लगाया और इसके लीगल स्टेटस पर सवाल भी उठाए। खड़गे ने कहा- भाजपा अपनी सोच की ताकत संघ से लेती है और इसीलिए राजनीतिक विरोधियों को भाजपा की बजाय सीधे संघ से लड़ना चाहिए। दरअसल, कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए उसे शैतान करार दिया और भाजपा को उसकी छाया बताया।
असली मुकाबला आरएसएस से
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि आरएसएस के बिना भाजपा का अस्तित्व कमजोर पड़ जाता। अगर आरएसएस नहीं होता, तो भाजपा की स्थिति और खराब होती। हम आज शैतान की छाया से लड़ रहे हैं। शैतान कौन है? आरएसएस। उसकी छाया कौन है? भाजपा। अगर हम छाया से नहीं, असली स्रोत से लड़ें, तो देश अपने आप बेहतर होगा। खड़गे यह भी कहा कि जब आरएसएस से उसके धन के स्रोत के बारे में पूछा जाता है, तो गुरु दक्षिणा का हवाला दिया जाता है। अपनी जानकारी के अनुसार गुरु दक्षिणा को ध्वज से जोड़ा जाता है। यदि कोई अन्य व्यक्ति भी अपना झंडा लगाकर चंदा इकट्ठा करे, तो क्या सरकार और आरएसएस उसे स्वीकार करेंगे। बिना ठोस जवाब दिए कोई भी संस्था जवाबदेही से नहीं बच सकती। जब तक आरएसएस संविधान और कानून के तहत पंजीकृत नहीं हो जाता, तब तक वे यह मुद्दा उठाते रहेंगे।
मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, फंडिंग पर सवाल
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी टिप्पणी करते हुए खड़गे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का स्वरूप अलग है, जबकि वर्तमान समय में धर्म की व्याख्या अलग तरीके से की जा रही है। उनके अनुसार, धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देना उचित नहीं है। खड़गे ने आरोप लगाया कि आरएसएस का 2,500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है, जिनमें अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में सक्रिय इकाइयां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की फंडिंग के स्रोतों की पारदर्शिता पर सवाल उठना चाहिए। जब आम नागरिकों और संस्थाओं को टैक्स देना पड़ता है और हर लेन-देन का हिसाब देना होता है, तो आरएसएस क्यों अलग है।
विवाह नहीं करते और दूसरों का दे रहे सलाह
पत्रकारों से बातचीत में खड़गे ने कहा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या वह खुद को कानून और संविधान से ऊपर मानता है। खड़गे ने कहा अगर यह व्यक्तियों का समूह है, तो क्या क्लब और एसोसिएशन भी ऐसे ही नहीं होते। क्या वे पंजीकृत नहीं हैं? क्या वे टैक्स नहीं देते। खड़गे ने कहा कि जो स्वयं विवाह नहीं करते, वे दूसरों को परिवार बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। भाजपा सार्वजनिक और निजी मंचों पर अलग-अलग बातें करती है और इसकी नीतियों का असर गरीब परिवारों पर पड़ता है।