सतना के एक निजी अस्पताल में आग की घटना ने जिले की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल समेत करीब 30 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम बिना फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। नोटिसों की अनदेखी, जिम्मेदारों की चुप्पी और मरीजों की जान खतरे में।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर के एक निजी अस्पताल की आग तो बगैर जन- हानि के बुझ गई लेकिन वह सिस्टम पर सवाल दाग गई। यहां के तमाम सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों का कमोवेश यही हाल है। जिम्मेदार फायर सेफ्टी के कागज दौड़ा रहे हैं और अस्पतालों के प्रबंधक उन्हें मनमानी की आग में राख कर देते हैं। यह तब है जब पड़ोस के जिले की अस्पताल की आग में हाल ही में एक नवजात झुलस चुका है।
जिले के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल समेत तमाम निजी अस्पताल और नर्सिंग होम बारूद की ढेर पर हैं। इनमें आग से निपटने के कोई पुख्ता इंतजामात नहीं हैं। पड़ोसी जिले रीवा में अस्पताल में आग लगने और उसमें एक नवजात के जलकर मरने की घटना के बाद भी किसी अस्पताल ने इससे सबक लेने की जहमत नहीं उठाई है। जिला अस्पताल समेत जिले में चल रहे लगभग 30 निजी अस्पतालों में से किसी के पास भी न तो फायर एनओसी है और न ही आग से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम।
तीन घंटे हलाकान हुए मरीज
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे बस स्टैंड में स्थित चित्रकूट चैरिटेबल अस्पताल के आॅपरेशन थियेटर में शार्ट सर्किट से आग लगने की घटना का मामला सामने आया। घटनाक्रम सामने आते ही मरीजों, परिजनों और प्रबंधन के कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। अस्पताल में चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल नजर आया। देखते ही देखते आग इतनी बढ़ गई कि उसकी लपटों ने सर्वर रूम को लपेटे में ले लिया। अस्पताल में एमर्जेन्सी एक्जिट एवं फायर सेफ्टी की व्यवस्था न होने से प्रबंधन के कर्मियों को फायर एक्सटिंग्विशर का सहारा लेना पड़ा। फायर एक्सटिंग्विशर से आग को काबू पाने में करीब तीन घंटे का समय लग गया। सूत्रों ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि यहां भर्ती मरीज भी जान बचाने भागता नजर आया। बताया जाता है कि घटनाक्रम के समय कोई भी जिम्मेदार मौजूद नहीं था।
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नोटिस के बाद भी नहीं की कोई व्यवस्था
बताया जाता है कि बस स्टैण्ड स्थित चित्रकूट अस्पताल में शार्ट सर्किट की वजह से शुक्रवार को आग लग गई। अस्पताल में आग लगने की घटना लोगों के सामने न आए इसको छिपाने की भरसक कोशिश अस्पताल प्रबंधन द्वारा की गई। यहां तक कि इसकी सूचना न तो पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई और न ही नगर निगम की फायर शाखा को। अस्पताल प्रबंधन द्वारा आग लगने की घटना को छिपाने की कोशिश को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है,कि आखिर क्या वजह है? आग की घटना को छिपाया गया। गौरतलब है कि नगर निगम की फायर शाखा द्वारा चित्रकूट चैरिटेबल अस्पताल को आग से निपटने के इंतजाम नहीं करने पर कई बार नोटिस जारी कर चुकी है। अभी एक माह पहले भी अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर 30 दिनों में व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन न तो अस्पताल प्रबंधन ने आग से निपटने के कोई इंतजाम किए और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया। चित्रकूट चैरिटेबिल अस्पताल प्रबंधन को नगर निगम द्वारा भेजी गई नोटिस में कहा गया था कि अस्पताल भवन, परिसर के लिए वैध फायर एनओसी प्राप्त करें। अस्पताल परिसर में फायर एक्सटिन्यूइशर, फायर हाईड्रेंट, अलार्म सिस्टम एवं आपातकालीन निकास मार्ग नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के निर्धारित मापदंड अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करें। नगर निगम की फायर शाखा द्वारा जारी की गई नोटिस में 30 दिनों का समय व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए दिया गया था।
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सिलेंडरों में नहीं मिला बैच नम्बर
जानकारी के अनुसार चित्रकूट चैरिटेबिल हास्पिटल में आग बुझाने के लिए लगाए गए अग्नि शामक सिलेंंडरों में कोई भी जानकारी दर्ज नहीं थी न ही उसमें मैनीफैक्चरिंग एवं न ही एक्सपायरी डेट डाली गई थी। ऐसा लग रहा था कि मानो एक बार लगाकर इस तरह दोबारा ध्यान नहीं दिया गया है। नियमन 6 माह एवं साल के अंतराल में इन सिलेंडरों की रिफलिंग कराना अनिवार्य है। रिफलिंग के दौरान सिलेंडरों में रिफलिंग की तारीखें भी दर्ज की जाती हैं। इसके अलावा बैच नम्बर और सीरियल नम्बर भी डालना अनिवार्य है।
जिला अस्पताल समेत जिले की दो दर्जन से ज्यादा निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं हैं। एक माह पहले सभी को आग से निपटने के इंतजाम करने की नोटिस जारी की गई थी पर न तो किसी ने नोटिस का जवाब दिया और न ही आग से निपअने की व्यवस्था की है। इन जिला अस्पताल समेत सभी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
सुलभ पाठक, प्रभारी फायर शाखा

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