भारतीय रेलवे में अब हलाल और झटका मीट का विवाद खत्म होगा। NHRC ने IRCTC और FSSAI को निर्देश दिया है कि यात्रियों को परोसे जाने वाले मांस की स्पष्ट जानकारी दी जाए। जानें क्या हैं नए नियम।

ट्रैन् में खाना खाते यात्री
भारतीय रेलवे (Indian Railways) में यात्रा के दौरान मांसाहारी भोजन करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर है। अक्सर धार्मिक मान्यताओं के कारण यात्री इस उलझन में रहते थे कि उन्हें परोसा जा रहा मांस 'हलाल' है या 'झटका'। अब इस संशय को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है।
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने IRCTC, FSSAI और पर्यटन मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है जिसमें कहा गया था कि खान-पान की संस्थाएं मांस के प्रकार को सार्वजनिक नहीं कर रही हैं। आयोग का मानना है कि उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं।
IRCTC के लिए आदेश: रेलवे के सभी वेंडरों और ठेकेदारों को अब स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि वे कौन सा मांस बेच रहे हैं। यह जानकारी यात्रियों के लिए मेन्यू या पैकेट पर उपलब्ध करानी होगी।
FSSAI की भूमिका: खाद्य नियामक संस्था से कहा गया है कि वह लेबलिंग की ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे सिख और अन्य धर्मों की भावनाओं का सम्मान हो सके।
होटल रैंकिंग में बदलाव: अब होटलों की स्टार रेटिंग में भी इस बात पर विचार किया जाएगा कि वे मांस के वर्गीकरण (हलाल/झटका) को कैसे दर्शाते हैं।
जीविका का अधिकार: आयोग ने तर्क दिया कि केवल 'हलाल' की अनिवार्यता से हिंदू और अन्य गैर-मुस्लिम मांस विक्रेताओं के व्यापार पर बुरा असर पड़ता है। इस स्पष्टता से उनके अधिकारों की भी रक्षा होगी।
रेलवे और संबंधित विभागों को इस पर 4 हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा गया है।
अभी तक की स्थिति
ट्रेन में मिलने वाले चिकन या मीट के पैकेट पर यह कहीं भी नहीं लिखा होता था कि वह 'हलाल' (Halal) है या 'झटका' (Jhatka)। आईआरसीटीसी (IRCTC) के मेन्यू कार्ड पर केवल 'Veg' या 'Non-Veg' के निशान (हरा और लाल बिंदु) होते थे। यात्रियों को वेंडर के भरोसे ही रहना पड़ता था।
ज्यादातर रेलवे कैटरर्स और सप्लायर्स अपनी सुविधा के लिए केवल 'हलाल' सर्टिफाइड मीट ही रखते थे। इसका कारण यह था कि मुसलमान केवल हलाल मांस खाते हैं, जबकि हिंदू या सिख आमतौर पर झटका मांस पसंद करते हैं लेकिन मजबूरी में हलाल खा लेते थे। इसलिए, विवाद से बचने के लिए वेंडर केवल एक ही तरह का मांस (हलाल) सर्व करते थे।
सिख धर्म: सिख धर्म में 'कुट्ठा' (हलाल) मांस खाना वर्जित है। लेबलिंग न होने के कारण सिख यात्री अक्सर ट्रेन में मांसाहार छूते भी नहीं थे।
हिंदू धर्म: कई हिंदू यात्री भी 'झटका' मांस को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में उन्हें संशय रहता था।
अगर कोई यात्री वेंडर से पूछता भी था कि मांस किस प्रकार का है, तो वेंडर के पास कोई आधिकारिक प्रमाण या सर्टिफिकेट दिखाने की व्यवस्था नहीं होती थी। अक्सर वेंडर सिर्फ मौखिक आश्वासन देकर खाना बेच देते थे।
चूंकि 'हलाल' सर्टिफिकेशन की मांग अधिक थी, इसलिए वे कसाई या विक्रेता जो 'झटका' मीट बेचते थे, उन्हें रेलवे के टेंडर या सप्लाई चेन में जगह मिलना मुश्किल होता था।

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