महाशिवरात्रि पर व्रत रखना पुण्यकारी है, लेकिन गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों और बुजुर्गों के लिए शास्त्रों में क्या नियम हैं? जानें किन्हें व्रत से बचना चाहिए और बिना उपवास के कैसे पाएं शिव-पार्वती का आशीर्वाद

धर्म डेस्क। स्टार समाचार वेब
महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का उत्सव है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आमतौर पर महाशिवरात्रि का व्रत अगले दिन पारण के साथ संपन्न होता है (जैसे 15 फरवरी को शिवरात्रि है, तो पारण 16 फरवरी को होगा)। हालांकि, शास्त्रों और स्वास्थ्य की दृष्टि से हर किसी के लिए कठिन व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। आइए जानते हैं किन लोगों को महाशिवरात्रि का उपवास रखने से बचना चाहिए और वे बिना व्रत के शिव कृपा कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शास्त्रों का मत है कि उन्हें निर्जला या कठोर व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान शिशु के विकास के लिए नियमित अंतराल पर पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। यही नियम स्तनपान कराने वाली माताओं पर भी लागू होता है। यदि श्रद्धा भाव अधिक हो, तो डॉक्टर की सलाह लेकर केवल फलाहार या बिना नमक के भोजन के साथ व्रत किया जा सकता है। महादेव तो अत्यंत भोले हैं, वे केवल एक लोटा जल अर्पित करने से भी प्रसन्न हो जाते हैं।
यदि कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी जैसे हृदय रोग, मधुमेह (Diabetes), या ब्लड प्रेशर (High/Low BP) से जूझ रहा है, तो उन्हें भूखा रहने से बचना चाहिए। लंबे समय तक खाली पेट रहने से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। ऐसे लोग उपवास के स्थान पर दान-पुण्य और मानसिक जाप पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। चिकित्सा परामर्श के बिना किया गया व्रत शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है, जबकि भक्ति का मार्ग सदैव खुला रहता है।
आयु बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा कम होने लगती है। बुजुर्गों को अपनी शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। उपवास की कठोरता अपनाने के बजाय वे महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी उपवास के समान ही पुण्य फलदायी माना जाता है।
मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मूर्तियों या मंदिर की सामग्री का स्पर्श नहीं कर सकतीं, लेकिन वे मानसिक रूप से भक्ति कर सकती हैं। इस स्थिति में व्रत रखना पूरी तरह वर्जित नहीं है। महिलाएं व्रत रख सकती हैं और भगवान शिव का मानसिक ध्यान, मंत्रों का जाप (जैसे 'ॐ नमः शिवाय') और स्तुति कर सकती हैं। महादेव भाव के भूखे हैं, और मानसिक पूजा का फल भी उतना ही प्राप्त होता है।
यदि आप किसी कारणवश व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। इन तरीकों से आप महादेव की कृपा पा सकते हैं...
शिवलिंग पर जल अभिषेक: मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
मंत्र जाप: 'महामृत्युंजय मंत्र' या शिव पंचाक्षर मंत्र का निरंतर जाप करें।
दान-पुण्य: इस दिन सफेद वस्तुओं (दूध, दही, चीनी, सफेद वस्त्र) का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
शिव चालीसा का पाठ: शांत मन से शिव चालीसा या शिव पुराण की कथाओं का श्रवण करें।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
विजयादशमी के शुभ अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी समेत देश के शीर्ष नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और समाज में सत्य व न्याय के पथ पर चलने का संदेश दिया।
20 अक्टूबर 2026 का पंचांग विस्तार से जानें। आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय और चौघड़िया की सटीक जानकारी।
20 अक्टूबर 2026 का मूलांक फल जानिए! अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 से 9 तक के लिए कैसा रहेगा आज का दिन। पढ़ें करियर, वित्त, प्रेम और स्वास्थ्य का सटीक भविष्यफल।
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्थित 'रावण गांव' में विजयादशमी पर पुतला दहन नहीं होता। यहां रावण को इष्ट देवता मानकर 'रावण बाबा' के रूप में पूजा जाता है। जानिए इस अनोखी परंपरा और मान्यता के बारे में।
उज्जैन में विजयादशमी पर 20 अक्टूबर को बाबा महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर दशहरा मैदान पहुँचेंगे। 1 लाख वर्गफीट रंगोली और 500 किलो फूलों की बारिश से होगा स्वागत।
शारदीय नवरात्रि की महानवमी के पावन अवसर पर सोमवार को पूरे मध्य प्रदेश में भक्ति, आस्था और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रदेश के विभिन्न जिलों, शक्तिपीठों और स्थानीय मंदिरों में हवन, कन्या पूजन और विशाल भंडारों का आयोजन किया गया।
शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां सिद्धिदात्री की आराधना करते हुए देशवासियों के लिए सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। इस अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देवी स्तुति से जुड़ा एक भजन भी साझा किया।
प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में रामलला के दर्शन करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुगम दर्शन पास व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें? जानें पंडित आनंद भारद्वाज से मां का प्रिय भोग, अर्धनारीश्वर स्वरूप, आठ सिद्धियों की कथा और अचूक मंत्र.
अंक ज्योतिष के अनुसार 19 अक्टूबर 2026 का दिन मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए कैसा रहेगा? जानिए करियर, धन, स्वास्थ्य और परिवार से जुड़ा विस्तृत राशिफल।