मध्य प्रदेश में 2017 से छात्र संघ चुनाव न होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। कोर्ट ने उच्च शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई न होने पर राज्य सरकार से 2 सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वर्ष 2017 से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए जाने का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुँच गया है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार द्वारा 'जल्द चुनाव कराने' के आश्वासन के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर, जबलपुर निवासी अदनान अंसारी ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 1 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन नहीं कर रहे हैं और चुनाव नहीं करा रहे हैं, जो छात्रों के संवैधानिक मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अक्षरदीप ने बेंच को बताया कि एक तरफ विश्वविद्यालय चुनाव नहीं करा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्रों से छात्र संघ शुल्क लगातार वसूला जा रहा है, जो कि पूरी तरह से अवैधानिक है।
इस जनहित याचिका में मध्य प्रदेश सरकार के अलावा प्रदेश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों को भी पक्षकार बनाया गया है। इनमें शामिल हैं: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (भोपाल), जीवाजी विश्वविद्यालय (ग्वालियर), देवी अहिल्याबाई होल्कर विश्वविद्यालय (इंदौर), रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (जबलपुर), अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा), विक्रम विश्वविद्यालय (उज्जैन), महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (छतरपुर) और राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय (छिंदवाड़ा)।
बुधवार को सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अगली सुनवाई में सरकार को इस संबंध में अपनी स्पष्ट स्थिति पेश करनी होगी।

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