मध्य प्रदेश सरकार प्रशासनिक मानचित्र में बड़े फेरबदल पर विचार कर रही है। जानिए 3 नए जिले, एक नया संभाग (खरगोन, बड़वानी, खंडवा, बुरहानपुर) बनाने का प्रस्ताव। साथ ही, भोपाल में 8 तहसीलें और मैहर-रीवा सीमा विवाद पर पूरी रिपोर्ट।

भोपाल. स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार ने राज्य के प्रशासनिक मानचित्र में महत्वपूर्ण फेरबदल करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें तीन नए जिले बनाने और एक नया संभाग (डिवीजन) स्थापित करने की योजना शामिल है। यह पुनर्गठन मुख्य रूप से इंदौर संभाग की अत्यधिक जनसंख्या और विशाल आकार के कारण प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए लाया गया है। राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग इस पूरे प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, जो तकनीकी ड्रोन-सैंपलिंग रिपोर्ट पर आधारित है।
प्रस्तावित बदलावों में इंदौर संभाग के दक्षिणी हिस्से को अलग करके एक नया संभाग बनाने की योजना है। इस नए संभाग में निम्नलिखित जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव है:
यह कदम प्रशासनिक कार्यों में अधिक सुगमता लाने और जनता तक प्रशासनिक पहुँच को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार, राजधानी भोपाल जिले में भी प्रशासनिक सुविधा के लिए तहसीलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में सीमित तहसीलों वाली भोपाल जिले में अब तहसीलों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। इस विस्तार का मुख्य लक्ष्य यह है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक तहसील स्तर का कार्यालय स्थापित हो सके, जिससे जन सेवा और प्रशासनिक पहुँच में सुधार हो।
प्रशासनिक पुनर्गठन के दायरे में मैहर और रीवा जिले की सीमाएँ भी शामिल हैं। प्रस्ताव में मैहर जिले के छह गांवों को कार्यक्षमता, दूरी की समस्याओं और स्थानीय मांगों के आधार पर रीवा जिले में शामिल करने की बात कही गई है।
हालांकि, इस सीमा परिवर्तन के प्रस्ताव पर स्थानीय स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है। सांसदों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि इस सीमा बदलाव से राजनीतिक और भौगोलिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग इस समूची प्रक्रिया की देखरेख कर रहा है। IIPA जैसी संस्थाओं को तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने और सर्वेक्षण करने के लिए मान्यता दी गई है।
यदि यह प्रशासनिक प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो मध्य प्रदेश के नक्शे में जिलों और तहसीलों की सीमाओं को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा। इस बड़े बदलाव का सीधा असर जन-संधार सेवाओं, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक सुगमता पर पड़ने की उम्मीद है

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