सतना जिला अस्पताल में 15 साल बाद टिटनेस का दुर्लभ मामला सामने आया है। पन्ना जिले के 19 वर्षीय युवक के पैर में कील चुभने के बाद टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगवाने से संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया। मरीज ICU में भर्ती है और ऑक्सीजन सपोर्ट पर उपचार जारी है।
By: Star News
Jan 03, 202612:49 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
डेढ़ दशक के बाद रेयर बीमारी टिटनेस का बैक्टीरिया एक्टिव हुआ है। यहां के जिला अस्पताल में पीड़ित को भर्ती भी कराया गया गया है। जिसका उपचार आईसीयू में किया जा रहा है। हालात यह है कि उसे ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम में रखा गया है। शरीर में टिटनेस के बैक्टीरिया फैल जाने से मरीज का शरीर अकड़ने के साथ मुंह खुलना भी बंद हो गया है। मरीज को अभी नाक में नाली लगाकर तरल पदार्थ दिया जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक पन्ना जिले के सरसा गांव निवासी लोकेन्द्र सिंह पिता मुन्ना सिंह उम्र 19 साल शहर के बाहर मंगलुरु में रहकर सटरिंग का कार्य करता था। एक सप्ताह पहले कार्य के दौरान उसके पांव में कील घुस जाने के कारण वह घायल हो गया था। प्राथमिक उपचार के लिए घाव में पट्टी करवाकर दर्द निवारक दवाइयां दी गई थी, लेकिन मरीज द्वारा टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगवाया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक टिटनेस के आधुनिक टीके के कारण अब यह बीमारी बड़ी रेयर हो गई है। इसके पहले जिले में 2010-11 में टिटनेस का मरीज मिला था और अब 2026 में पन्ना जिले का मरीज टिटनेस से पीड़ित पाया गया है।
मरीज का पल्स-बीपी हाई
तीन दिन बाद मरीज के घाव में संक्रमण फैलने लगा और मरीज को असहाय पीड़ा होने लगी। मरीज का पल्स और बीपी भी हाई होने लगा था। पीड़ा ठीक न होने पर उसने पन्ना आकर इलाज कराने का मन बनाया। संक्रमण से पीड़ित युवा जिला अस्पताल आने से पहले मैहर सिविल अस्पताल पहुंचा जहां चिकित्सकों ने देखकर उसे जिला अस्पताल सतना में उपचार कराने की सलाह दी।
दिया गया इम्यूनोग्लोबिन और एंटीबायोटिक का डोज
चिकित्सकों ने बताया कि मरीज जब जिला अस्पताल पहुंचा संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया था। मरीज की क्लीनिकल हिस्ट्री से पता चला कि मरीज को टिटनेस का संक्रमण हुआ है। गंभीर अवस्था में होने के कारण उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। मरीज का पूरा शरीर अकड़ा हुआ है। मरीज को बचाने के लिए इम्यूनोग्लोबिन और एंटीबायोटिक का डोज शुरू किया गया। जिला अस्पताल में यह इम्म्यूनोग्लोबिन भर्ती मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध होता है जबकि बाजार में यह इंजेक्शन महंगा बिकता है। हालांकि मरीज की सेहत में अब सुधार है लेकिन अभी 10 से 12 दिन ऑब्जर्वेशन में रखा जायेगा इसके बाद मरीज का कल्चर रिपोर्ट कि जांच कराकर बैक्टीरिया की जांच की जाएगी।
ये रेयर बीमारी है। लम्बे समय बाद जिला अस्पताल में टिटनेस का कोई केस आया है। जंग लगे लोहे आदि से चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना जरूरी है। इसे लगाने के बाद 6 माह तक संक्रमण से बचा जा सकता है। इस बीमारी से पीड़ित की पहचान 3 दिन से 21 दिन के बीच में होती है।
डॉ. बद्री विशाल सिंह, एमडी, मेडिसिन जिला अस्पताल