रीवा के सुपर स्पेशलिटी और संजय गांधी अस्पताल में लगी हाईटेक एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें डीन की लापरवाही और टेक्नीशियन की कमी से शुरू नहीं हो पाई। मरीज महंगे प्राइवेट सेंटरों पर जांच कराने को मजबूर।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
सुपर स्पेशलिटी और संजय गांधी अस्पताल में लगी 21 करोड़ की एमआरआई और सीटी स्केन मशीन जंग खा रही है। इसे चलाने वाले टेक्नीशियन नहीं है। डीन की लापरवाही से मशीनें इंस्टाल होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाई। मरीज प्राइवेट सेंटरों में लुट रहे हैं।
विंध्य के लोगों को सस्ती जांच की सुविधा मिल सके। इसके लिए डिप्टी सीएम ने दो हाईटेक और महंगी मशीनें लगवार्इं। एमआरआई सुपर में और सीटी स्केन संजय गांधी अस्पताल में इंस्टाल हुई। डिप्टी सीएम ने एक महीने पहले उद्घाटन भी कर दिया लेकिन अब तक मशीनें शुरू नहीं हुई। हद तो यह है कि मरीज हर दिन जांच कराने के लिए सेंटर पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा। अस्पताल प्रबंधन ने फिलहाल जांच के लिए लगने वाली फिल्म तक की व्यवस्था नहीं की है। सिर्फ कंपनी से जो सेम्पल वाली फिल्में मिली थी। उसी से काम चलाया जा रहा है।
1 टेक्नीशियन और कम कर दिए
पहले कार्यकारिणी की बैठक में एमआरआई और सीटी स्केन के लिए 5-5 पदों का प्रस्ताव रखा गया था। पहले 10 पद स्वीकृत कर दिए गए। बाद में डीएमई ने इसमें दो पदों की कटौती कर दी। डीन को स्थानीय स्तर पर टेक्नीयिनों की नियुक्ति करनी थी। 8 पद भरने थे। पहले से कोई तैयारी नहीं थी। विज्ञापन भी नहीं निकाला गया। गुपचुप तरीके से आउटसोर्स से ही 7 कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई है। इन्हें मशीन चलाने का अनुभव भी नहीं है। 4 कर्मचारी एमआरआई और 3 सीटी स्केन को मिले हैं। इन्हें फिलहाल 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। 1 सितंबर से ट्रेनिंग चलेगी। कंपनी ने इन्हें दोनों मशीनों के संचालन की जानकारी देगी।
25 जुलाई को डिप्टी सीएम ने एमआरआई का किया था शुभारंभ
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 13 करोड़ रुपए की लागत से हाईटेक एमआरआई मशीन स्थापित की गई है। ऐसी मशीन आसपास के जिलों में कहीं भी स्थापित नहीं है। मशीन आने के बाद पहले इसके इंस्टालेशन में देरी की गई। महीनों तक इसका इंस्टालेशन चला। अब जब मशीन चलने के लिए तैयार हुई तो कर्मचारी ही नहीं है।
3 अगस्त को सीटी स्केन मशीन का किया गया था शुभारंभ
8 करोड़ की लागत से संजय गांधी अस्पताल में नई सीटी स्केन मशीन आई। इसका शुभारंभ 3 अगस्त को डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने किया। शुभारंभ के दौरान एक मरीज की जांच की गई। फिर बंद हो गई। कर्मचारियों की कमी के कारण इसे चलाया नहीं जा सका। सीटी स्केन मशीन विंध्य में सबसे हाई टेक मशीन है। इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
अभी मशीन भी हैंडओव्हर नहीं हो पाई
सूत्रों की मानें तो सब कुछ आधा अधूरा ही है। यहां स्थापित की गई सीटी स्केन मशीन भी अस्पताल को हैंडओव्हर नहीं हो पाई है। अभी कंपनी का कुछ काम अधूरा है। इसके पहले ही मशीन का शुभारंभ आधी अधूरी तैयारी के साथ शुरू कर दिया गया।
आरएचडी में लुटने से बच जाएंगे मरीज
वर्तमान समय में रीवा हेल्थ डायग्नोस्टिक सेंटर संजय गांधी अस्पताल में ही चल रहा है। यहां की जांच और रेट काफी महंगा है। संजय गांधी अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी में एमआरआई और सीटी स्केन की जांच दर काफी कम है। इन मशीनों के चलने से आरएचडी की दुकानदारी भी प्रभावित होगी। जांच की दरें भी निर्धारित हो गई है। इसके बाद भी इसे शुरू करने में देरी की जा रही है।
यह भी मानी जा रही है वजह
आउटसोर्स से रीवा हेल्थ डायग्नोस्टिक सेंटर अब तक यहां सेवाएं दे रहा था। सीटीस्केन और एमआरआई जांच दोनों ही कर रहा था। आयुष्मान के मरीजों की जांच और प्राइवेट आने वाले मरीजों की जांच की जाती थी। आयुष्मान का करोड़ों रुपए का बिल मेडिकल कॉलेज के पास अभी भी कंपनी का पेडिंग है। बिल पास करने के नाम पर अधिकारी कंपनी से मोटी रकम लेते आ रहे हैं।इसी कमीशन के चक्कर में ही अस्पताल की मशीनें शुरू नहीं की जा रही हैं।
हमारी तैयारी पूरी है। जांच की दरें भी फाइनल हो गई हैं। एमआरआई के लिए 4 टेक्नीशियन मिले हैं। इन्हें कंपनी ट्रेनिंग देगी। इसके बाद जांच शुरू हो जाएगी।
डॉ अक्षय श्रीवास्तव, अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रीवा

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