रीवा जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था चरमरा गई है। कई खरीदी केन्द्रों में किसानों को तीन-तीन दिन तक तौल के लिए जागना पड़ रहा है। कहीं तौल कांटे खराब हैं तो कहीं बारदाने नहीं हैं। सेमरिया क्षेत्र में नाराज किसानों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
जिले में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी एक बार फिर से बेपटरी हो गई है। खरीदी केन्द्रों में कई दिनों से जहां किसान अपनी उपज की तौल के लिए रतजगा कर रहे हैं, वहीं कई खरीदी केन्द्रों में बिगड़े तौल कांटे एवं बारदाने की कमी से धान की तौल ही नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को सेमरिया के किसानों ने खरीदी व्यवस्था को लेकर चकाजाम भी किया है। हालांकि मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही है।
गौरतलब है कि जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए इस बार 97 खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं। जिनमें किसानों के सुविधा अनुसार धान की तौल एवं समय पर किसानों के भुगतान का दावा किया गया है। आलम यह है कि जिले के किसी भी खरीदी केन्द्र में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी में व्यापक अनियमितताएं की जा रही हैं। किसानों की मानें तो खरीदी केन्द्र प्रभारी एवं जिम्मेदारों द्वारा जहां 40 किलो के स्थान पर 41 किलो से साढ़े 41 किलो तक वजन कर किसानों को चूना लगाया जा रहा है, वहीं कई ऐसे भी किसान हैं जिन्हें अपनी उपज की तौल कराने के लिए कई दिनों तक खुले आसमान के नीचे अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो जिन किसानों की पकड़ खरीदी केन्द्र के जिम्मेदारों से है, उनकी तौल हो रही है परंतु ऐसे किसान जिनका कोई माई-बाप नहीं है उन्हें कड़ाके की ठंड में कई दिनों तक खुले आसमान के नीचे अपने धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
केन्द्र में नहीं हैं बारदाने
जिले के 97 खरीदी केन्द्रों में कई ऐसे भी केन्द्र हैं जिनमें दो-तीन दिन से बारदाने नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उन किसानों के उपज की तौल ही नहीं हो पा रही है। कई ऐसे भी खरीदी केन्द्र हैं जहां के तौल कांटे ही खराब हैं। माना यह जा रहा है कि नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक कमलेश दाण्डेकर व्यवस्था बनाने में रुचि ही नहीं ले रहे हैं। विभाग से मिली जानकारी में बताया गया है कि डीएम नॉन के करीबी खरीदी केन्द्र में तो बारदाने पहुंच रहे हैं लेकिन ऐसे खरीदी केन्द्र जिनमें नॉन के प्रबंधक श्री दाण्डेकर की रुचि नहीं है वहां कटे-फटे बारदाने भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं कई खरीदी केन्द्र बारदानों के अभाव में चल रहे हैं। ऐसे में अब यह स्पष्ट हो गया है कि डीएम नॉन द्वारा बारदानों में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
अलाव की नहीं है व्यवस्था
खरीदी केन्द्रों में न तो किसानों के लिए छाया की व्यवस्था बनाई गई है और न ही अलाव जलाए जा रहे हैं। ऐसे किसान जिनकी उपज तौल कराने में दो से तीन दिन लग रहे हैं वह खुले आसमान के नीचे कंपकंपाती ठण्ड में अपनी धान की सुरक्षा कर रहे हैं। हालांकि शासन द्वारा किसानों को खरीदी केन्द्र में पर्याप्त सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं जो हवा हवाई साबित हो रहे हैं। बताया गया है कि प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम कमलेश दाण्डेकर द्वारा न तो अलाव की व्यवस्था कराई जा रही है और न ही पीने के पानी की ही सुविधा खरीदी केन्द्रों में उपलब्ध हो पा रही है।
रीवा-सेमरिया मार्ग पर किसानों ने लगाया जाम
सेमरिया क्षेत्र के खरीदी केन्द्र बंद होने से नाराज किसानों ने शुक्रवार को रीवा-सेमरिया (बनकुइयां) मार्ग सहित दढ़िया बड़ामार्ग पर ट्रैक्टर अड़ाकर पूरी तरह से यातायात रोक दिया। सड़क के बीच टेंट गाड़कर किसान धरने पर बैठ गए जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लगभग एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहा इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत किए तब जाकर जाम खोला गया। किसानों का कहना है कि जांच के बाद भी कल्पना वेयर हाउस और तिघरा खरीदी केन्द्र शुरू नहीं किए गए। जिससे धान लेकर आए किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुनवाई न होने से उन्हें जाम का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है।
शिल्पी वेयर हाउस मनगवां, तिवनी में अमानक खरीदी
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए बनाए गए ऐसे कई खरीदी केन्द्र हैं जिनमें डब्ल्यूएलसी के कर्मचारियों द्वारा अमानक खरीदी की गई है। शिल्पी वेयर हाउस मनगवां एवं तिवनी में अमानक खरीदी किए जाने का एक मामला सामने आया है। गोदाम में नियुक्त डब्ल्यूएलसी कर्मचारियों द्वारा 125 बोरी ऐसी धान उतरवाई गई है जिसमें दाने ही नहीं हैं। सर्वेयर प्रकाश सिंह एवं अभिनव सिंह भंडारण शिल्पी वेयर हाउस मनगवां, तिवनी द्वारा जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम रीवा कमलेश दाण्डेकर को एक पत्र के माध्यम से शुक्रवार को जानकारी दी गई है। ताज्जुब की बात यह है कि उक्त अमानक धान को हटाया तक नहीं गया है एवं उसको स्टॉक में मिलाने की कोशिश की जा रही है। उनके द्वारा स्पष्ट कहा गया है कि अमानक धान को स्टॉक में मिलाने के लिए उनके ऊपर दबाव भी बनाया जा रहा है। दावा किया गया है कि जिन बोरों में अमानक धान भरी गई है उन्हें एक हाथ से उठाया जा सकता है।

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