सतना जिले में चिकित्सकों की भारी कमी से इलाज संकट गहरा गया है। जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में 62 में से सिर्फ 19 डॉक्टर ही तैनात हैं।

सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी बदहाली, जिले में 52 मेडिकल ऑफिसर्स के पदों में से 43 रिक्त
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल इन दिनों विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जिले में 62 चिकित्सकों की दरकार है। जानकारी के मुताबिक अकेले जिला अस्पताल को ही 19 स्पेस्लिस्ट एवं 14 मेडिकल ऑफिसरों की आवश्यकता है, जबकि मेडिसिन विशेषज्ञों के 4 स्वीकृत पदों में से 3 पद वर्तमान में रिक्त हैं। इससे अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोग और मरीजों के परिजन इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में प्रथम श्रेणी के विशेषज्ञों मे शल्य क्रिया विशेषज्ञ के 2, निश्चेतना विशेषज्ञ के 4, नेत्र रोग विशेषज्ञ के 2, रेडियोलॉजी विशेषज्ञ के 3, पैथोलॉजी विशेषज्ञ के 2, नाक कान गला विशेषज्ञ के 1 और दन्त रोग विशेषज्ञ के 2 पद रिक्त हैं। कमोबेश यही हालात सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी है जिसके कारण समाज के अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाने के तमाम सरकारी दावों के बीच जिले की ‘चिकित्सा व्यवस्था ’ स्वयं बीमार नजर आ रही है। जिले में चिकित्सा स्टाफ की यह कमी उस जानकारी में सामने आई है जिसमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एलके तिवारी ने स्वास्थय आयुक्त को जिले के स्पेशलिस्ट और मेडिकल आॅफिसर के रिक्त पदों की जानकारी भेजकर डिमांड भेजी है।
मेडिकल ऑफिसर्स के 43 पद खाली
जिले में मेडिकल ऑफिसर्स की भी भारी कमी देखने को मिल रही है। सिर्फ जिला अस्पताल में मेडिकल आॅफिसर्स के 27 स्वीकृत पदों में से 14 पद अभी भी खाली हैं। इससे ओपीडी सेवाओं और प्राथमिक चिकित्सा में बाधा उत्पन्न हो रही है। जिले के अलावा संस्थावार मेडिकल ऑफिसर्स के 29 पद सालों से रिक्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक नागौद अंतर्गत अमकुई एवं रौंड, उचेहरा की कुलगड़ी,अटरा, कोठी की घूरडांग, डगडीहा, रामपुर बाघेलान की चूंद खुर्द , सेलहना, मझगवां की खुटहा, रिमारी, बेरहना, पगार खुर्द पीएचसी में मेडिकल ऑफिसर्स के पद अभी भी खाली हैं।
सर्व सुविधा युक्त सामु.स्वा. केंद्रों में स्त्री रोग विशेषज्ञ ही नहीं
सबसे बड़ी बिडम्बना यह है कि जिले की दर्जनों स्वास्थय संस्थाओं में स्त्री रोग विषेशज्ञों की कमी है। जिससे कि गर्भवती मरीजों का पूरा लोड जिला अस्पताल में बढ़ जाता है और कई गर्भवती को समय से इलाज उपलब्ध नहीं हो पता और कई योजनों से वो वंचित तक हो जाती हैं। अगर जिले के विकासखंडों की बात करें तो जिले के पांच विकासखंडों नागौद, उचेहरा, कोठी, रामपुर बाघेलान और मझगवां में संचालित सामुदाईक स्वास्थ्य केंद्रों में विभाग द्वारा सभी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी के चलते ये स्वास्थय संस्थाएं खाली ही पड़ी रहती हैं। इन स्वास्थय संस्थाओं में मरीज इलाज के लिए पहुंचता तो है मगर चिकित्सकों के न मिलने पर उसे जिला अस्पताल की ही राह पकड़नी पड़ती है। मिली जानकारी के अनुसार नागौद, उचेहरा,कोठी, रामपुर बाघेलान और मझगवां में अंतर्गत प्रथम श्रेणी के शल्य क्रिया, मेडिकल, स्त्री रोग एवं एनेस्थीसिया जैसे सभी पद स्वीकृत होने के बाद भी सभी रिक्त हैं।
स्वास्थ्य आयुक्त के अलावा प्रभारी मंत्री को भी डिमांड भेजकर जिला चिकित्सालय व विभिन्न सीएचसी में चिकित्सकों की मांग की गई है। जैसे ही डिमांड पूरी होगी स्टाफ की कमी दूर हो जाएगी।
डा. एलके तिवारी, सीएमएचओ
इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं संसाधन चाहिए सरकार
लाखों-करोड़ों के इंफ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट के लिए जितनी तत्परता दिखाई जाती है, काश उतनी ही तत्परता चिकित्सा सेवा की रीढ़ माने जाने वाले चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य संसाधनों को मुहैया कराने में नहीं दिखाई जाती है, मानों मरीजों का इलाज ‘चिकित्सक व स्टाफ नहीं बल्कि वेल आर्किटेक्टेड बिल्डिंग’ करती हों। जिला अस्पताल व विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक ही नहीं होंगे तो समाज के अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाने की सरकारी मंशा कैसे परवान चढ़ेगी? जाहिर है कि इंफ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जिन अस्पतालों को सुविधाओं के नमा पर भवन व टाइल्स लगाकर डेवलप किया जा रहा है, वहां बैठने व मरीज को देखने के लिए चिकित्सक तो हों।

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