सतना में सिक्कों का संकट गहराया। दुकानदारों के बाद अब पुलिस ने भी 10-10 रुपए के सिक्के लेकर जुर्माना स्वीकार करने से इंकार कर दिया। जबकि रिजर्व बैंक और सरकार ने सिक्कों के चलन पर रोक नहीं लगाई है। जनता परेशान, प्रशासन मौन।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में इन दिनों छोटे नोट और सिक्के को लेकर अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। सतना में दुकानदारों ने चिल्लर लेना पहले ही बंद कर दिया था अब सरकारी संस्थाएं भी रिजर्व बैंक द्वारा चलाई जा रही मुद्राएं स्वीकार करने से इंकार कर रही हैं। पुलिस महकमे द्वारा चालानी कार्रवाई के दौरान लगाई गई जुर्माना राशि को चिल्लर की शक्ल में लेने से इंकार कर दिया। हेलेमेट के लिए की गई कार्रवाई में बंधे नोट न दे पाने के कारण बाइक को अब थाने में खड़ा करा लिया गया है। इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार टिकुरिया टोला निवासी अनिल कचेर उर्फ आयुष अपनी बाइक क्रमांक एमपी 19 जेडसी 7659 से कोठी रोड में अपने मामा से मिलने जा रहा था। उसी दौरान सिविल लाइन में लगी वाहन चेकिंग के दौरान आयुष को रोका गया और हेलमेट न होने पर जुर्माना लगाया गया। इसी दौरान तैनात पुलिसकर्मी ने उसे 300 रूपए जुर्माना अदा करने के लिए कहा जिसे चुकाने के लिए आयुष ने अपने पास मौजूद 10 रूपए के 30 सिक्के निकाले लेकिन पुलिसकर्मियों ने यह कहकर सिक्के लेने से इंकार कर दिए कि वे चिल्लर स्वीकार नहीं करेंगे। सवाल यह है कि जब रिजर्व बैंक व भारत सरकार ने इन सिक्कों का चलन शुरू किया है तो कोई चिल्लर लेने देने में आनाकानी कैसे कर सकता है?
आसपास के जिलों में धड़ल्ले से चल रहे सिक्के
बेशक सरकार ने 1, 2, 5व 10 के सिक्के बंद न किए हों लेकिन सतना में सिक्के लेने से परहेज किया जाता है। 5 व 10 के सिक्के तो कारोबारी स्वीकार भी कर लेते हैं लेकिन 1 व 2 रूपए के सिक्के सतना में चलन से ही बाहर कर दिए गए हैं , जबकि बड़े व्यापारी तो 5 व 10 के सिक्के लेने से भी इंकार कर देते हैं। इससे उपभोक्ताओं को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। या तो उन्हें राउंड फिगर में खरीदी के लिए बाध्य होना पड़ता है या फिर चिल्लर पैसे छोड़ने पड़ते हैं। विडंबना की बात है जबलपुर, कटनी, विदिशा, भोपाल, इंदौर जैसे प्रदेश के अन्य शहरों में हर प्रकार के वे सिक्के जिन्हें सरकार चला रही है, उनका उपयोग हो रहा है , मगर सतना में चिल्लरों के उपयोग को लेकर न प्रशासनिक संजीदगी दिखाई जा रही है और न ही भारतीय मुद्रा के हो रहे खुले अपमान पर प्रशासन कोई कदम उठाने को तैयार है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से अलग-अलग सौजन्य भेंट की। इन बैठकों में प्रदेश के औद्योगिक विकास, वस्त्र क्षेत्र में निवेश, रोजगार सृजन और युवाओं के कौशल विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।
1984 के सिख विरोधी दंगों की पीड़ित बुजुर्ग महिला को हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति संजीव कालगांवकर की एकलपीठ ने सीहोर जिला प्रशासन द्वारा सात लाख 23 हजार 800 रुपए की राहत राशि वापस लेने के आदेश और रिकवरी नोटिस को निरस्त कर दिया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सागर जिले में बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। शाहगढ़ में अवैध शराब आरोपी की जमीन और NH-44 पर सौरभ ढाबे पर बुलडोजर चलाकर करोड़ों की सरकारी भूमि मुक्त कराई गई।
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जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने पक्षकारों की पीड़ा, वकीलों के अधिकारों और न्याय प्रणाली पर दिए बेबाक विचार।
ग्वालियर के चर्चित अवैध हथियार खरीद-फरोख्त मामले में शान गन हाउस के संचालक अशोक अग्रवाल की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है।