भारतीय शेयर बाजार में बीते छह दिनों से जारी बिकवाली ने निवेशकों को 17 लाख करोड़ का चपत लगाई है। जानें ट्रंप की टैरिफ नीति और FII की बिकवाली ने कैसे बिगाड़ा बाजार का मूड।
By: Ajay Tiwari
Jan 12, 202612:23 PM
नए साल की शुरुआत जिस तेजी की उम्मीद के साथ हुई थी, वह अब निवेशकों के लिए भारी निराशा में बदल गई है। दलाल स्ट्रीट पर बीते छह कारोबारी सत्रों से जारी जबरदस्त बिकवाली ने बाजार की कमर तोड़ दी है। सेंसेक्स और निफ्टी में मची इस उठापटक के कारण निवेशकों की संपत्ति में लगभग 17 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है।
सोमवार को भी बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक टूटकर 83,043 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 140 अंकों की गिरावट के साथ 25,550 के नीचे फिसल गया।
सेंसेक्स की गिरावट: 2 जनवरी को 85,762 पर बंद होने वाला सेंसेक्स अब तक 2,700 से ज्यादा अंक लुढ़क चुका है।
निफ्टी की स्थिति: निफ्टी में अब तक करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई है।
मार्केट कैप: बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर अब 464.39 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर अनिश्चितता: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और भारत के साथ व्यापारिक समझौतों को लेकर स्पष्टता की कमी निवेशकों को डरा रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ संबंधी किसी ठोस फैसले के न आने से बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
FII की भारी बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। पिछले छह दिनों से जारी इस बिकवाली के क्रम में बीते शुक्रवार को ही एफआईआई ने लगभग 3,769 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार की लिक्विडिटी पर बुरा असर पड़ा है।
कमजोर वैश्विक संकेत और तनाव: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता पर सवाल, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक (Geo-political) तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों के भरोसे को कम किया है।