सिरमौर का 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। बुखार सहित सामान्य बीमारियों का इलाज भी संभव नहीं, मरीजों को रीवा जैसे जिला मुख्यालयों तक भटकना पड़ रहा है।

हाइलाइट्स
सिरमौर, स्टार समाचार वेब
सिरमौर का 100 बिस्तरों वाला हास्पिटल बदहाली का शिकार हो रहा है। यहां पर मरीजों को बेहतर तो छोड़ दीजिये किसी भी तरह का उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते मरीजों को जिला मुख्यालय तक उपचार के लिये दौड़ लगानी पड़ रही है। सिरमौर को सिविल अस्पताल का दर्जा दिलाने और आलीशान भवन उपलब्ध कराने का श्रेय सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह को ही है। यहां तक की बात तो ठीक है। अब असल और सम्पूर्ण श्रेय लेने में विधायक भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अन्यथा करोड़ों की लागत से बनने वाली अस्पताल का कुछ और ही महत्व होता।
रिक्त पड़े हैं चिकित्सकों के पद
इतनी बड़ी और भव्य अस्पताल को चलाने वाले चिकित्सकों की कमी है। अस्पताल के लिए एक सुपरिटेंडेंट का पद स्वीकृत है जो आज तक नहीं भरा गया। विशेषज्ञों की बात करें मेडिसिन और सर्जरी के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों पद रिक्त हैं। जबकि दोनों पद अति महत्वपूर्ण हैं। निश्चेतना विशेषज्ञ का पद भी स्वीकृत है। नेत्र रोग और आथोर्पेडिक विशेषज्ञ के एक-एक पद स्वीकृत हैं लेकिन रिक्त हैं। विशेषज्ञ के नाम पर शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं।
वर्तमान में चार नियमित तथा पांच बांड चिकित्सकों की नियुक्ति है। चार नियमित चिकित्सकों में दो पीजी की तैयारी के चलते अवकाश पर हैं। अगले सप्ताह वापस आ जाएंगे। तब तक सात चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा है
-डॉ. अंकित तिवारी, प्रभारी बीएमओ
विधायक व मंत्री नहीं दे रहे ध्यान
प्रदेश मे डबल इंजन की सरकार है। क्षेत्रीय विधायक सत्ताधारी दल के हैं। जिनकी मजबूत पकड़ मुख्यमंत्री तक है। उप मुख्यमंत्री जो स्वास्थ्य मंत्री भी हैं, रीवा जिले के हैं। आम लोगों के स्वास्थ्य की चिंता भी उन्हें है लेकिन सिरमौर वासियों का दुर्भाग्य है कि इतनी बड़ी अस्पताल को कुशल चिकित्सक देने की ओर माननीयों का ध्यान नहीं है। यदि यहां स्वीकृत चिकित्सा विशेषज्ञों की पूर्ति हो जाए तो गरीबों को दूसरे जगह उपचार के लिये नहीं जाना पड़ेगा।

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