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धान परिवहन की सुस्त रफ्तार ने खोली सहकारी व्यवस्था की पोल: 9 उपार्जन केंद्र 30 फीसदी से भी नीचे, भुगतान अटका और भंडारण संकट गहराया

सतना जिले में धान उपार्जन के बीच परिवहन की धीमी गति चिंता का विषय बन गई है। 21 समितियों में परिवहन 30 से 50 फीसदी के बीच अटका है, जबकि 9 केंद्र 30 फीसदी से भी कम पर हैं। इससे किसानों के भुगतान, भंडारण व्यवस्था और मिलिंग चक्र पर सीधा असर पड़ रहा है।

By: Star News

Jan 03, 202612:43 PM

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धान परिवहन की सुस्त रफ्तार ने खोली सहकारी व्यवस्था की पोल: 9 उपार्जन केंद्र 30 फीसदी से भी नीचे, भुगतान अटका और भंडारण संकट गहराया

हाइलाइट्स:

  • जिले की 9 उपार्जन समितियों में धान परिवहन 30 फीसदी से भी कम, खरीदी केंद्रों पर दबाव बढ़ा।
  • परिवहन में देरी से किसानों का भुगतान लंबित, गुणवत्ता और मिलिंग चक्र पर खतरा।
  • लापरवाही पर परिवहन कर्ता फर्मों को नोटिस, प्रति टन प्रतिदिन 25 रुपये जुर्माने का प्रावधान।

सतना, स्टार समाचार वेब

जिला में धान उपार्जन के बीच परिवहन की धीमी चाल ने सहकारी खरीदी व्यवस्था की पोल खोल दी है। समीक्षा में सामने आया कि कुल 21 उपार्जन समितियों में परिवहन का प्रतिशत 30 से 50 फीसदी के बीच अटका हुआ है, जबकि 9 समितियां 30 फीसदी से भी कम परिवहन कर पाई हैं। इसी तरह 40 फीसदी से नीचे 4 और 50 फीसदी से नीचे 8 समितियां हैं। यह स्थिति खरीदी केंद्रों पर धान बोरियों के बढ़ते दबाव, भंडारण संकट और आगामी मिलिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।  

जिला आपूर्ति अधिकारी ने परिवहन ठेकेदारों और समिति प्रबंधनों को लक्ष्य अनुरूप गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सहकारी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवहन की रफ्तार जल्द नहीं सुधरी, तो खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था, धान की गुणवत्ता पर असर और मिलिंग चक्र में देरी तय है। किसानों ने भी मांग की है कि परिवहन तंत्र को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि उपार्जन का लाभ बिना बाधा मिल सके।

केस-01

रामनगर ब्लाक के टेगना और देउरा गांव के किसान चंद्रभान पांडेय, आशाराम त्रिपाठी और सरोज पांडेय का भुगतान लंबित है। इन तीनों किसानों ने 2 दिसम्बर को अपनी उपज बेची थी। इनकी सहकारी समिति गंजास के स्थल मार्केंडेय वेयरहाउस में खरीदी गई थी। 

केस-02 

मझगवां ब्लाक के ग्राम किटहा, झरी, बम्हौरी के किसान कपिल मिश्रा, सुंदर लाल शर्मा और रामगणेश मिश्रा ने दिसंबर माह की 5 तारीख को अपने स्लॉट के आधार उपज बेंची थी लेकिन आज तक भुगतान नहीं हो पाया है। 

इनसे लेना चाहिए सबक 

जिला में 10 ऐसी भी समितियां हैं जहां की धान का 100 फीसदी परिवहन हो चुका है। जानकारी के मुताबिक सेवा सहकारी समिति भटनवारा, सेवा सहकारी समिति इचौल, बरमेन्द्र स्थल, सेवा सहकारी समिति बेरहना शुकवाह स्थल, ओम शांति समूह गगनेन्द्र वेयरहाउस, सेवा सहकारी बेरहना पगारखुर्द, सेवा सहकारी समिति मढ़ीकला, सेवा सहकारी जमुना स्थल जमुना, सेवा सहकारी समिति चूंद तिहाई नाम शामिल हैं। इनसे तमाम समितियों को सबक लेना चाहिए। 


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30 फीसदी से कम 

मिलिंग और उठाव चक्र में सबसे पिछड़े केंद्रों में सेवा सहकारी समिति वर्ती मात्र 20फीसदी परिवहन कर पाई, मानुषी स्व-सहायता समूह पगारखुर्द 22 फीसदी, सिजहटा 25 फीसदी, रिछुल 26 फीसदी, शिवराजपुर स्थल-1 पर 30फीसदी, शिवराजपुर स्थल-2 पर 24फीसदी, गोलहटा 29 फीसदी, सुरदहा 29फीसदी और जर्नादनपुर स्थित मां शारदा समूह 30फीसदी परिवहन तक सीमित रहा। 

40 फीसदी से कम 

बजरंग स्व-सहायता समूह बिहटा 35 फीसदी, जसो समिति 34 फीसदी, क्षेत्रीय सहकारी विपणन संस्था 37 फीसदी और गुढ़ा समिति 40 फीसदी परिवहन प्रतिशत पर हैं। यहां परिवहन अपेक्षित लक्ष्य से काफी पीछे है, जिससे भंडारण क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है।


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50 फीसदी से कम 

गंगा स्व-सहायता समूह गोवरांव खुर्द 46 फीसदी, सविनम महिला समूह खम्हरिया 44 फीसदी, लक्ष्मी स्व-सहायता समूह गजिगवां 41 फीसदी, रामानुजम विपणन अबेर 41 फीसदी, भंवर संस्था 42 फीसदी, सकरिया 43 फीसदी, जमुना द्वितीय केंद्र 50 फीसदी और सराय द्वितीय स्थल भी 50 फीसदी परिवहन तक ही पहुंच सके।

प्रतिदिन की 25 प्रति टन जुर्माना 

परिवहन कर्ता फर्म द्वारा बरती जा रही कोताही को लेकर जहां एक ओर जिला आपूर्ति अधिकारी नाराज हैं वहीं किसानों के भुगतान लंबित होने से उनमें भी आक्रोश पनप रहा है। जानकारी के मुताबिक परिवहन कर्ता यदि समय पर धान का उठाव और परिवहन नहीं करता तो उस पर नियमन 25 रुपए प्रति टन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि आपूर्ति अधिकारी ने नोटिस भेज कर इस कोताही का जवाब मांगा है। 

सिकमी में गड़बड़ी, ऑपरेटर्स की उपार्जन से छुट्टी 

सिकमी पंजीयन को लेकर मचे घमासान के बीच समितियों के ऑपरेटर्स की छुट्टी कर दी गई है। इनके द्वारा अनुबंध पत्रों को तरीके से और एक ही जैसे कई किसानों के इसमें अपलोड करने की शिकायत मिल रही थी। जिस पर उपायुक्त सहकारिता ने मामले में दोषी ऑपरेटर्स को भविष्य में भी काम करने से छुट्टी कर दी है। जानकारी के मुताबिक उपायुक्त सहकारिता ने शुक्रवार को जारी आदेश में धान उपार्जन में लगे समितियों के ऑपरेटर्स की हटा दिया है। इस सूची में  सेवा सहकारी समिति डेंगरहट के ऑपरेटर दीपनारायण द्विवेदी, विपणन सहकारी समिति नागौद के ऑपरेटर शैलेन्द्र कुमार अहिरवार, विपणन सहकारी समिति मर्यादित रामानुजम अबेर के ऑपरेटर राज प्रताप सिंह, सेवा सहकारी समिति अबेर ऑपरेटर के शैलेष कुमार पांडेय  एवं सेवा सहकारी समिति नागौद बारापत्थर के ऑपरेटर लवलेश कुमार कुशवाहा का नाम शामिल है।  उपायुक्त सहकारिता ने पृथक-पृथक दिए आदेशों में कहा है कि पंजीयन्, उपार्जन, प्रभारी और प्रबंधक संबंधित ऑपरेटर्स से लॉगिन आईडी, पॉसवर्ड एवं अन्य अभिलेख भी वापस ले लें। 

बोलते आंकड़ें

3750935 टन कुल खरीदी 
3485607 टन रेडी टू ट्रांसपोर्ट 
2463095 टन परिवहन मात्रा 
1313906 शेष मात्रा 

परिवहन न होने से बिगड़ेगा 

  1. केंद्रों पर भंडारण संकट
  2. स्लॉट और तौल व्यवस्था बिगड़ना
  3. धान की गुणवत्ता पर असर
  4. मिलिंग चक्र में देरी
  5. किसानों को भुगतान में विलंब
  6. परिवहन लागत बढ़ना
  7. प्रशासनिक निगरानी और विश्वास कमजोर होना

परिवहन कर्ता फर्म को नोटिस जारी किया गया है। जवाब आने तक का इंतजार है। उसी आधार पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। 

सम्यक जैन, जिला आपूर्ति अधिकारी सतना

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