सतना और मैहर की कई गौशालाओं में तेज आंधी से टीन शेड उड़ गए और ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। पंचायतों ने मरम्मत बजट और स्थायी रखरखाव व्यवस्था नहीं होने पर शासन की योजना और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
265 करोड़ के सतना स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की रफ्तार बेहद धीमी है। 24 माह में पूरा होने वाले काम का 20 माह बाद भी आधा हिस्सा अधूरा है, जिससे पीएम गति शक्ति यूनिट और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली सवालों में घिर गई।
सतना जिला अस्पताल में थैलीसीमिया बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले की जांच तेज हो गई है। प्रशासन ने 196 संदिग्ध डोनरों की सूची तैयार कर दोबारा एचआईवी जांच शुरू कराई, जबकि कई डोनरों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।
सतना मेडिकल कॉलेज में पांच माह से जारी जलसंकट, लिफ्ट और बिजली समस्याओं पर छात्रों का प्रदर्शन तेज हुआ। कलेक्टर की फटकार के बाद इंजीनियरों ने पंद्रह दिनों में स्थाई समाधान और आपात सुधार का भरोसा दिया।
सतना नगर निगम की एमआईसी बैठक में कुत्तों के बधियाकरण और टीकाकरण पर प्रति कुत्ता 980 रुपये खर्च तय किया गया। साथ ही निर्माण कार्य, नामकरण और अन्य विकास प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
सतना जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। लक्ष्य के मुकाबले केवल 45.28 प्रतिशत लोग साक्षर हुए, जिससे जिला प्रदेश के निचले पायदान पर पहुंच गया है।
सतना मेडिकल कॉलेज में पांच महीनों से जल संकट बना हुआ है। छात्रों के विरोध के बाद प्रबंधन ने टैंकर और मोटर से अस्थायी राहत दी, जबकि पाइपलाइन सुधार के लिए दस दिन का आश्वासन मिला है।
सतना में विंध्य चेम्बर ऑफ कॉमर्स चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हैं। चार प्रमुख दावेदार मैदान में हैं, जबकि 1700 वोटरों के बीच राजनीतिक प्रभाव भी चुनाव को दिलचस्प बना रहा है।
सतना जिले में नरवाई जलाने के मामलों पर सैटेलाइट मॉनिटरिंग से कार्रवाई हुई। आठ किसानों को नोटिस और छह को कोर्ट में पेशी के निर्देश दिए गए, फिर भी प्रशासनिक सख्ती पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना जिले में मातृ मृत्यु के मामले बढ़कर 37 पहुंचे, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाते हैं। एनीमिया, हाई बीपी और समय पर इलाज न मिलने से अधिकतर मौतें हुईं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी।






















