अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। तेल उत्पादन के लिए सिर्फ अमेरिका से पार्टनरशिप और चीन-रूस का बहिष्कार अनिवार्य। जानें वेनेजुएला के तेल संकट की पूरी कहानी।

वाशिंगटन/काराकास | 08 जनवरी 2026
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और डेल्सी रोड्रिग्ज के अंतरिम राष्ट्रपति बनने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले तेल पर अपना शिकंजा कस दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के नए नेतृत्व को स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अपने विशाल तेल भंडार का लाभ तभी मिलेगा जब वे वाशिंगटन की राजनीतिक और आर्थिक शर्तों को स्वीकार करेंगे।
ट्रंप प्रशासन की पहली और सबसे बड़ी शर्त यह है कि वेनेजुएला को अपने पुराने सहयोगियों—चीन, रूस, ईरान और क्यूबा—को देश से बाहर करना होगा। चीन वर्तमान में वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि काराकास इन देशों से सभी आर्थिक संबंध तोड़ ले। दूसरी शर्त के मुताबिक, वेनेजुएला को तेल उत्पादन के लिए केवल अमेरिकी कंपनियों के साथ साझेदारी करनी होगी और कच्चे तेल के निर्यात में अमेरिका को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक निजी ब्रीफिंग में सांसदों को बताया कि वेनेजुएला इस समय पूरी तरह मजबूर है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण वेनेजुएला अपना तेल निर्यात नहीं कर पा रहा है, जिससे उसके स्टोरेज टैंक और टैंकर पूरी तरह भर चुके हैं। दिसंबर के अंत से ही वेनेजुएला ने तेल के कुएं बंद करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल के कुएं लंबे समय तक बंद रहे, तो उन्हें दोबारा शुरू करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा होगा, जिससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पूरी तरह जमींदोज हो सकती है।
सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रोजर विकर ने संकेत दिया है कि अमेरिका को वेनेजुएला पर नियंत्रण पाने के लिए सैनिकों की जरूरत नहीं है। आर्थिक दबाव और तेल की बिक्री पर रोक ही वेनेजुएला को दिवालिया बनाने के लिए पर्याप्त है। अमेरिकी अनुमानों के अनुसार, काराकास के पास अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए केवल कुछ ही हफ्तों का समय बचा है। यदि डेल्सी रोड्रिग्ज की सरकार ट्रंप की शर्तें नहीं मानती है, तो देश का आर्थिक पतन निश्चित है।

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