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विश्व मानक दिवस (14 अक्टूबर): गुणवत्ता, सुरक्षा और सतत विकास की नींव हैं 'अंतर्राष्ट्रीय मानक'

विश्व मानक दिवस (14 अक्टूबर) क्यों मनाया जाता है? जानें मानकीकरण का महत्व, इतिहास और यह कैसे गुणवत्ता, सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देता है।

By: Ajay Tiwari

Oct 13, 20253:46 PM

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विश्व मानक दिवस (14 अक्टूबर): गुणवत्ता, सुरक्षा और सतत विकास की नींव हैं 'अंतर्राष्ट्रीय मानक'

स्टार समाचार वेब. फीचर डेस्क

  • प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व मानक दिवस (World Standards Day) मनाया जाता है। यह दिन उन हजारों विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के सहयोगात्मक प्रयासों को समर्पित है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानक विकसित करने में स्वेच्छा से योगदान देते हैं। ये मानक न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में उत्पादों और सेवाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए भी एक अटूट नींव का काम करते हैं।

उद्देश्य और महत्व

विश्व मानक दिवस का प्राथमिक उद्देश्य उपभोक्ताओं, नियामकों (Regulators) और उद्योगों के बीच वैश्विक मानकीकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। मानक आवश्यक तकनीकी दस्तावेज होते हैं जो सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद और सेवाएं अपने उद्देश्य के लिए उपयुक्त हैं, सुरक्षित हैं, और पर्यावरण के अनुकूल हैं।

संक्षेप में, मानक:

  • उत्पादों की गुणवत्ता: उपभोक्ता को भरोसा दिलाते हैं कि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद मिल रहा है।

  • सुरक्षा सुनिश्चित: विभिन्न उद्योगों में सुरक्षा के उच्चतम स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं, दुर्घटनाओं को कम करते हैं।

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा: विभिन्न देशों के बीच तकनीकी बाधाओं को दूर कर व्यापार को सुगम बनाते हैं।

  • नवाचार और दक्षता: सर्वोत्तम प्रथाओं को स्थापित कर नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं और औद्योगिक प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाते हैं।

विश्व मानक दिवस का इतिहास

14 अक्टूबर की तारीख को विशेष रूप से चुना गया क्योंकि इसी दिन वर्ष 1946 में लंदन में 25 देशों के प्रतिनिधियों ने पहली बार मुलाकात की थी। इस बैठक का उद्देश्य मानकीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाने पर विचार करना था। इस पहल के परिणामस्वरूप, एक साल बाद अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) का औपचारिक रूप से गठन हुआ। हालाँकि, पहला विश्व मानक दिवस वर्ष 1970 में मनाया गया था।

आज, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण के कार्य में आईएसओ (ISO) के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (IEC) और अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) जैसी प्रमुख संस्थाएँ भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। ये संगठन मिलकर सुनिश्चित करते हैं कि दुनिया भर में तकनीकी समझौते और मानक विकसित हों।

भारत में मानकीकरण

भारत में मानकीकरण के लिए शीर्ष निकाय भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) है, जो 1987 में संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था। बीआईएस देश के भीतर उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मानक तय करता है, और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सतत विकास और मानक

पिछले कुछ वर्षों से, विश्व मानक दिवस का केंद्रीय विषय संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है। मानक, एसडीजी के विभिन्न पहलुओं जैसे स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, स्मार्ट शहरों के निर्माण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक एक साझा ढाँचा प्रदान करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक बेहतर और अधिक टिकाऊ दुनिया के लिए वैश्विक सहयोग और मानकीकरण कितना आवश्यक है।


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