रीवा जिला अस्पताल के एसएनसीयू में 750 ग्राम वजन के नवजात को नई जिंदगी, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सराहनीय सफलता।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल रीवा के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में सीधी जिले की अंजू केवट के उस नवजात को नया जीवन मिला है, जिसका जन्म के समय वजन मात्र 750 ग्राम था। यह बच्चा न केवल समय से काफी पहले (29 सप्ताह का) पैदा हुआ था, बल्कि जन्म के तुरंत बाद उसे सांस लेने में गंभीर समस्या थी। निजी अस्पताल से गंभीर हालत में रेफर होकर आए इस अति अल्प वजन वाले शिशु के बचने की उम्मीद बेहद कम थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि भर्ती के समय बच्चे की हालत अत्यंत नाजुक थी। उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखकर सर्फैक्टेंट थैरेपी और कैफीन साइट्रेट जैसी जीवन रक्षक दवाएं दी गईं। उपचार के दौरान कई बार उतार-चढ़ाव आए। दूसरे ही दिन बच्चा शॉक में चला गया, जिससे उसकी नाड़ी कमजोर पड़ने लगी। लेकिन एसएनसीयू टीम के निरंतर मॉनिटरिंग और सटीक इलाज से धीरे-धीरे सुधार होने लगा।
53 दिन बाद बढ़ा बजन, मां का दूध पीने को मिला
वेंटिलेटर से सीपीएपी और फिर आॅक्सीजन हुड तक का सफर तय करते हुए, बच्चे ने 53 दिनों तक मौत से जंग लड़ी। इस दौरान कंगारू मदर केयर फोटोथेरेपी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी जटिल प्रक्रियाओं के जरिए बच्चे की स्थिति को स्थिर किया गया। 53 दिनों के अथक परिश्रम के बाद जब बच्चे का वजन बढ़कर 1.520 किलोग्राम हो गया और वह मां का दूध पीने में सक्षम हुआ, तब उसे सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। अंजू केवट और उनके परिजनों के चेहरे पर अब मुस्कान है और वे रीवा जिला अस्पताल की सुविधाओं के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि रीवा का एसएनसीयू अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी संजीवनी साबित हो रहा है, जहां अत्याधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ टीम के जरिए गंभीर से गंभीर मामलों में भी शिशुओं की जान बचाई जा रही है। चिकित्सा विज्ञान और मानवीय प्रयासों के संगम ने एक बार फिर चमत्कार कर दिखाया है।


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