मध्य प्रदेश को पूरी दुनिया टाइगर स्टेट के नाम से जानती है। यहां बाघों की बढ़ती संख्या पर तालियां बजती हैं... जश्न मनाए जाते हैं... लेकिन आज उसी प्रदेश से एक डरावनी तस्वीर सामने आ रही है...। जी हां... मध्य प्रदेश के जंगलों में इन दिनों बाघों की दहाड़ से ज्यादा उनकी लाशों का शोर है।
By: Arvind Mishra
Feb 02, 20262:14 PM

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश को पूरी दुनिया टाइगर स्टेट के नाम से जानती है। यहां बाघों की बढ़ती संख्या पर तालियां बजती हैं... जश्न मनाए जाते हैं... लेकिन आज उसी प्रदेश से एक डरावनी तस्वीर सामने आ रही है...। जी हां... मध्य प्रदेश के जंगलों में इन दिनों बाघों की दहाड़ से ज्यादा उनकी लाशों का शोर है। एक के बाद एक रहस्यमयी मौतें और 24 घंटे के भीतर दो बाघों का खत्म हो जाना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मध्यप्रदेश की जनता भी करने लगी है कि टाइगर स्टेट अब धीरे-धीरे टाइगर कब्रिस्तान में तब्दील हो रहा है। आए दिन हो रही बाघों की मौत से वन्यजीव प्रेमियों और आम लोगों में भी चिंता का माहौल है। दरअसल, शहडोल जिले के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत सर्किल मसिरा के आरएफ 382 के पास एक बाघ और एक बाघिन के संदिग्ध शव मिलने से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई है। डॉग स्क्वॉड सहित कई टीमें क्षेत्र में सघन सर्चिंग कर रही हैं।
200 मीटर की दूरी में दो शव
रविवार को देर रात सबसे पहले एक बाघ का शव मिलने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच प्रारंभ की। इसी दौरान सोमवार तड़के उसी स्थान के आसपास एक बाघिन का शव भी बरामद हुआ, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। दोनों शव राजस्व क्षेत्र में एक-दूसरे से 200 मीटर की दूरी में पाए गए।
मौके पर पहुंचीं डीएफओ
दोनों बाघों की मौत करंट लगने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वन विभाग ने अभी इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके को घेराबंदी कर सुरक्षित कर लिया गया है और हर एंगल से जांच की जा रही है। इधर, घटना की जानकारी मिलते ही डीएफओ भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। वन विभाग का कहना है कि जल्द ही जांच पूरी कर मौत के कारणों का खुलासा किया जाएगा।
बाघों की मौत का रिकॉर्ड
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 2025 में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। 2026 में भी आधा दर्जन के करीब बाघों की मौत हो चुकी है। जो गलियारों और बफर जोन में बढ़ते खतरों का संकेत देती है। एनटीसीए के आंकड़ों के अनुसार भारत में 2025 में 166 बाघों की मौत दर्ज की गई । महाराष्ट्र (38), केरल (13) और असम (12) का स्थान रहा।
इनका कहना है
दो बाघों की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही किया जा सकेगा। पीएम रिपोर्ट से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वन विभाग की डॉग स्क्वॉड टीम, फील्ड स्टाफ और अन्य विशेषज्ञ दल क्षेत्र में सर्चिंग कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह प्राकृतिक मौत है या फिर किसी तरह की साजिश अथवा अवैध गतिविधि का मामला है।
तरुणा वर्मा, डीएफओ, जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र