जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल ने दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज आरएमएल अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। निधन की जानकारी उनके एक्स हैंडल से पोस्ट कर दी गई है।

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया। फाइल फोटो
नई दिल्ली। स्टार समाचा वेब
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल ने दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज आरएमएल अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। निधन की जानकारी उनके एक्स हैंडल से पोस्ट कर दी गई है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने दोपहर 1 बजे नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां उनका इलाज चल रहा था। वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। हालत, ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें 11 मई को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सत्यपाल मलिक अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के अंतिम राज्यपाल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान ही 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करके उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया था। संयोग की बात है कि आज ही इस फैसले की छठी वर्षगांठ है और इसी दिन सत्यपाल मलिक ने अंतिम सांस ली।

सत्यपाल मलिक अक्टूबर 2017 से अगस्त 2018 तक बिहार के राज्यपाल रहे। उन्हें 21 मार्च 2018 से 28 मई 2018 तक ओडिशा के राज्यपाल के रूप में कार्य करने का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया। जम्मू-कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के बाद सत्यपाल मलिक को गोवा का 18वां राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने अक्टूबर 2022 तक मेघालय के 21वें राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया।
सत्यपाल मलिक का जन्म उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में 24, जुलाई 1946 को एक जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने मेरठ विवि से विज्ञान में स्नातक और एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1968-69 में, मेरठ विवि के छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए, जिससे उनके राजनीतिक जीवन की शुरूआत हुई। राजनेता के रूप में उनका पहला प्रमुख कार्यकाल 1974-77 के दौरान उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य के रूप में रहा। उन्होंने 1980 से 1986 और 1986-89 तक राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। वह 1989 से 1991 तक जनता दल के सदस्य के रूप में अलीगढ़ से ग9नौवीं लोकसभा के सदस्य रहे।
सत्यपाल मलिका को 1980 में, चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाले लोकदल ने राज्यसभा के लिए नामित किया, लेकिन 1984 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए और पार्टी ने उन्हें 1986 में राज्यसभा भेजा। बोफोर्स घोटाले का खुलासा होने के बाद उन्होंने 1987 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और वीपी सिंह के साथ जुड़ गए। 1989 में, उन्होंने जनता दल के उम्मीदवार के रूप में अलीगढ़ से लोकसभा चुनाव जीता और 1990 में, कुछ समय के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य और पर्यटन राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
2004 में, मलिक भाजपा में शामिल हो गए और बागपत से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन तत्कालीन रालोद प्रमुख अजित सिंह से हार गए। अपने पहले कार्यकाल में, मोदी सरकार ने मलिक को भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विचार करने वाली संसदीय टीम का प्रमुख नियुक्त किया था। उनके पैनल ने विधेयक के खिलाफ कई सिफारिश कीं, जिसके बाद सरकार ने इस प्रमुख रिफॉर्म को ठंडे बस्ते में डाल दिया। कश्मीर में मिलिटेंसी शुरू होने के बाद से सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल पद पर नियुक्त होने वाले पहले राजनेता थे।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
पुरी रथ यात्रा के दौरान ग्रैंड रोड पर मची भारी भीड़ से बिगड़े हालात। दम घुटने और हार्ट अटैक से दो श्रद्धालुओं की दुखद मौत, कई घायल।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपियों टिन्नू और मनीष यादव से जेल में पूछताछ की। पुलिस अब कस्टडी रिमांड लेकर रकम के निवेश और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की तैयारी में है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को सीबीआई की याचिका पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का अंतिम अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17-18 अगस्त को होगी।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते हमलों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक लगा दी है।
आतंकी फंडिंग और अवैध घुसपैठ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। आज यानी गुरुवार को ईडी की टीमों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र में फैले नेटवर्क को खंगालते हुए 13 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने महिलाओं को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी महिला सरकारी कर्मचारी को उसकी दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए मातृत्व अवकाश देने से सिर्फ इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसकी पहली प्रेग्नेंसी में जुड़वां बच्चे पैदा हुए थे।
देश के ज्यूडिसियल सिस्टम और पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, पूर्वाग्रह-मुक्त और मानवीय बनाने की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। जिसके अनुसार सभी कोर्ट और थानों में चरित्रहीन जैसे अपमानजनक शब्द को प्रयोग नहीं किया जाएगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में इन दिनों बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। प्राइवेट स्पेस सेक्टर के आकर्षक पैकेज की ओर आकर्षित होकर पिछले एक साल में चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे अहम मिशन से जुड़े 100 से 120 वरिष्ठ वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस्तीफा दे दिया है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को अमित शाह पर विवादित टिप्पणी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने आवाज का नमूना जांचने की याचिका को खारिज कर दिया।
केंद्र सरकार ने देश के विकास के लिए 2,19,353 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इसमें सेमीकंडक्टर 2.0, वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर और यूरिया नीति सहित कई बड़ी घोषणाएं शामिल हैं।