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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस...सभी को मिले पढ़ने और लिखने का अधिकार

8 सितंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। जानें कि यह दिन क्यों महत्वपूर्ण है, इसका इतिहास क्या है, और शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने में इसकी क्या भूमिका है।

By: Ajay Tiwari

Sep 04, 20255:48 PM

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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस...सभी को मिले पढ़ने और लिखने का अधिकार

स्टार समाचार वेब. फीचर डेस्क

दुनिया भर में 8 सितंबर को "अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस" (International Literacy Day) मनाया जाता है। यह दिन शिक्षा और साक्षरता के महत्व को उजागर करने और समाज से निरक्षरता को खत्म करने के लिए प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने के लिए समर्पित है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को साक्षरता के प्रति जागरूक करना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी को पढ़ने और लिखने का अधिकार मिले।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुरुआत 1966 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा की गई थी। 17 नवंबर, 1965 को यूनेस्को के 14वें सामान्य सम्मेलन में 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया गया। इसका पहला उत्सव 1966 में मनाया गया था। तब से, यह दिन प्रत्येक वर्ष एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जो वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और अवसरों को दर्शाता है।

साक्षरता का महत्व

साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता से कहीं अधिक है। यह व्यक्ति के जीवन में कई मायनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है..

  • व्यक्तिगत विकास: साक्षरता व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त करने, दुनिया को बेहतर ढंग से समझने और अपनी क्षमताओं का विकास करने में मदद करती है।
  • आर्थिक सशक्तीकरण: साक्षर व्यक्ति को बेहतर रोजगार के अवसर मिलते हैं, जिससे उसकी आय बढ़ती है और वह गरीबी के जाल से बाहर निकल पाता है।
  • सामाजिक न्याय: साक्षरता लोगों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करती है, जिससे वे सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग ले पाते हैं।
  • स्वास्थ्य और पोषण: साक्षरता लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को समझने और बेहतर जीवनशैली अपनाने में मदद करती है।
  • बच्चों की शिक्षा: साक्षर माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा में अधिक प्रभावी ढंग से मदद कर सकते हैं, जिससे शिक्षा का चक्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी जारी रहता है।

निरक्षरता एक वैश्विक चुनौती

आज भी, दुनिया भर में लाखों लोग निरक्षर हैं, खासकर विकासशील देशों में। निरक्षरता गरीबी, सामाजिक असमानता और लैंगिक भेदभाव का एक प्रमुख कारण है। अंतरराष्ट्रीय  साक्षरता दिवस इन चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करता है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम

हर साल, यूनेस्को एक विशेष थीम तय करता है, जो साक्षरता के किसी विशेष पहलू पर जोर देती है। यह थीम समसामयिक मुद्दों जैसे सतत विकास, डिजिटल साक्षरता, या जीवन कौशल शिक्षा पर केंद्रित हो सकती है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि साक्षरता को कैसे अधिक प्रासंगिक और प्रभावी बनाया जा सकता है।

भारत में साक्षरता

भारत ने साक्षरता दर बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं, जैसे सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन, और डिजिटल साक्षरता अभियान, चलाई जा रही हैं। हालाँकि, अभी भी काफी काम करना बाकी है। ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों में साक्षरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक प्रतिबद्धता है। यह हमें याद दिलाता है कि शिक्षा एक मौलिक मानव अधिकार है और साक्षरता एक बेहतर और न्यायपूर्ण दुनिया का आधार है। हमें सभी को शिक्षित करने और समाज से निरक्षरता को पूरी तरह से मिटाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। यह एक ऐसा लक्ष्य है जो व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तरों पर मानव प्रगति और गरिमा को सुनिश्चित करता है।

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