आध्यात्मिक चेतना के शिखर पुरुष और चित्रकूट स्थित प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज 102 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए हैं।
By: Star News
Feb 07, 202610:10 PM
सतना। स्टार समाचार वेब
आध्यात्मिक चेतना के शिखर पुरुष और चित्रकूट स्थित प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज 102 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए हैं। उन्होंने मुंबई के बदलापुर स्थित आश्रम में देह त्यागी। उनके महाप्रयाण की सूचना मिलते ही चित्रकूट, सतना सहित देशभर में फैले उनके लाखों अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
धारकुंडी आश्रम के संत संजय महाराज ने बताया कि स्वामी जी की पार्थिव देह को ससम्मान मुंबई से धारकुंडी लाया जा रहा है। रविवार को भक्त और श्रद्धालु स्वामी जी के अंतिम दर्शन करेंगे। वहीं, सोमवार को पूर्ण विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के साथ उन्हें समाधि दी जाएगी। उनके विभिन्न आश्रमों में श्रद्धालु दीप जलाकर और अखंड भजन-कीर्तन कर भावांजलि अर्पित कर रहे हैं।
धारकुंडी आश्रम की स्थापना
स्वामी जी का आध्यात्मिक सफर अत्यंत कठोर और प्रेरणादायी रहा। अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद जी के आशीर्वाद से उन्होंने 22 नवंबर 1956 को चित्रकूट के घने जंगलों वाले धारकुंडी क्षेत्र में आश्रम की नींव रखी थी। उस समय यह क्षेत्र अत्यंत दुर्गम और बीहड़ था, जहाँ स्वामी जी ने वर्षों तक मौन और कठोर तपस्या की।
101वां जन्मोत्सव और अंतिम चित्रकूट आगमन
एक जनवरी 2025 को स्वामी जी का 101वां जन्मोत्सव अत्यंत भव्यता के साथ मनाया गया था। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से वे तब बदलापुर में थे, लेकिन उन्होंने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपने शिष्यों को आशीर्वचन दिए थे। लगभग चार महीने पहले ही महाराज जी अल्प प्रवास पर चित्रकूट आए थे। तब उनकी एक झलक पाने के लिए लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था।
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