बांग्लादेश चुनाव आयोग ने 12 फरवरी को मतदान केंद्रों के 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगा दिया है। जानें क्यों दक्षिणपंथी दल इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
By: Ajay Tiwari
Feb 10, 20264:05 PM
ढाका। स्टार समाचार वेब
बांग्लादेश निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी 12 फरवरी को होने वाले मतदान के संबंध में जारी एक नए निर्देश ने देश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। आयोग ने निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान का हवाला देते हुए वोटिंग केंद्रों के 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के सामने आते ही दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और निर्णय वापस न होने पर चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करने की धमकी दी है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, मतदान के दिन किसी भी व्यक्ति को मोबाइल फोन के साथ मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इतना ही नहीं, केंद्र के चारों ओर 400 गज की परिधि को 'नो मोबाइल जोन' घोषित किया गया है। यह प्रतिबंध न केवल आम मतदाताओं पर, बल्कि मतदान एजेंटों और चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकांश कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होगा। आयोग का मानना है कि इस कदम से मतदान की गोपनीयता बनी रहेगी और किसी भी प्रकार की डिजिटल गड़बड़ी को रोका जा सकेगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध सार्वभौमिक नहीं है, बल्कि कुछ विशेष पदों पर आसीन अधिकारियों को इससे छूट दी गई है। केंद्र के पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer), सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे पुलिस प्रभारी और चुनाव ड्यूटी पर तैनात दो अधिकृत अर्ध-पुलिस अंसार सदस्य ही अपने पास मोबाइल फोन रख सकेंगे। इन अधिकारियों को यह छूट केवल आपातकालीन संचार और चुनाव संचालन की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए दी गई है।
इस फैसले के खिलाफ दक्षिणपंथी खेमे में भारी आक्रोश है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने इस निर्देश की कड़ी निंदा करते हुए इसे अलोकतांत्रिक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्वाचन आयोग इस विवादास्पद फैसले को तुरंत वापस नहीं लेता है, तो वे देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। विपक्षी दलों का तर्क है कि मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने से मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता कम हो सकती है और गड़बड़ी की निगरानी करना मुश्किल हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आयोग और विपक्षी दलों के बीच आम सहमति नहीं बनी, तो 12 फरवरी को स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है।