बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा। पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने मोहम्मद यूनुस सरकार पर चुनाव टालने और भारत के खिलाफ साजिश रचने का लगाया आरोप

बंग्लादेश में हो रहे उग्र प्रदर्शन.
हाइलाइट्स
ढाका: स्टार समाचार वेब
बांग्लादेश में पिछले वर्ष जुलाई के विद्रोह के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी की मौत ने पूरे देश को एक बार फिर हिंसा की आग में झोंक दिया है। राजधानी ढाका सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसक विरोध प्रदर्शन और आगजनी की घटनाएं हो रही हैं। इसी बीच, 18 दिसंबर की देर रात उग्र भीड़ ने पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी के घर को निशाना बनाते हुए उसमें आग लगा दी, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहिबुल हसन चौधरी ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर देश में अराजकता फैला रही है ताकि चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टाला जा सके।
हसन ने भारतीय दूतावास पर हुए हमलों को एक सोची-समझी रणनीति बताते हुए कहा, "उस्मान हादी की मौत का भारतीय उच्चायोग से कोई संबंध नहीं है। भीड़ को जानबूझकर उकसाया गया ताकि भारतीय दूतावास को बंद कराया जा सके और नई दिल्ली से तीखी प्रतिक्रिया ली जा सके। यह सब भारत को उकसाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद पैदा करने के लिए किया जा रहा है।"
पूर्व मंत्री ने वर्तमान सत्ता के सलाहकारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ऊपर से भीड़ को उकसा रहा है और साथ ही पुलिस व सेना को मूकदर्शक बने रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने उस्मान हादी को एक 'कट्टरपंथी' करार दिया जो हिंसा की विचारधारा में विश्वास रखता था।
हसन के अनुसार, यूनुस सरकार कट्टरपंथी राजनीतिक दलों की मदद से दंगों को हवा दे रही है। उन्होंने कहा, "ये जिहादी मानसिकता वाले लोग हैं जो सत्ता के लालच में देश को अव्यवस्था की ओर धकेल रहे हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता में बने रहना है और चुनाव में देरी करना है।"
वर्तमान में बांग्लादेश एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ कूटनीतिक संबंधों और आंतरिक सुरक्षा, दोनों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पूर्व मंत्री के घर पर हमला इस बात का संकेत है कि देश में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और अल्पसंख्यकों व राजनीतिक विरोधियों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।

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