भारत 1 जनवरी से BRICS की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। जानें कैसे ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापारिक दबाव के बीच भारत इस समूह को नई दिशा देगा

नई दिल्ली:
वैश्विक राजनीति और व्यापार में मची उथल-पुथल के बीच भारत ने आधिकारिक तौर पर BRICS की अध्यक्षता स्वीकार कर ली है। ब्राजील से मिली यह जिम्मेदारी केवल एक कूटनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'टैरिफ वॉर' और आक्रामक व्यापारिक नीतियों के दौर में भारत के नेतृत्व की बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। 1 जनवरी से भारत इस शक्तिशाली समूह का नेतृत्व औपचारिक रूप से शुरू करेगा।
अध्यक्षता के हस्तांतरण के दौरान ब्राजील ने भारत को अमेजन वर्षावन की लकड़ी से बना एक विशेष हथौड़ा सौंपा। यह प्रतीक सतत विकास और साझेदारी की मजबूती का संदेश देता है। जहाँ 2024 में रूस ने स्टील का हथौड़ा दिया था, वहीं ब्राजील का यह उपहार पर्यावरण और प्रकृति के प्रति समूह की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद BRICS देशों पर दबाव बढ़ा है। ट्रंप ने डॉलर के विकल्प की तलाश कर रहे देशों पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह BRICS को 'अमेरिका विरोधी मंच' बनने से बचाए और इसे वैश्विक विकास के एक सकारात्मक विकल्प के रूप में पेश करे।
भारत ने संकेत दिया है कि उसका कार्यकाल नवाचार, लचीलापन और सततता पर केंद्रित होगा। भारत के एजेंडे में निम्नलिखित विषय प्रमुख रहेंगे:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): एक साझा शासन ढांचा तैयार करना।
जलवायु वित्त: विकासशील देशों के लिए पर्यावरण अनुकूल निवेश जुटाना।
विकास सहयोग: सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक और आर्थिक तालमेल बढ़ाना।
ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा के अनुसार, BRICS की सफलता अब केवल बयानों से नहीं बल्कि आम जनता के जीवन में आने वाले बदलावों से मापी जाएगी। भारत की अध्यक्षता यह तय करेगी कि बदलती विश्व व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज कितनी प्रभावी रहती है।

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