इंदौर में स्वच्छता के पीछे छिपे जल-वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान। बिना अनुमति चल रहे 243 उद्योगों को नोटिस जारी, बिजली काटने की तैयारी। 9 फरवरी को अगली सुनवाई।
By: Ajay Tiwari
Jan 21, 20264:31 PM
इंदौर। स्टार समाचार वेब
स्वच्छता में देश का सिरमौर रहने वाले इंदौर के 'उजले चेहरे' के पीछे छिपे प्रदूषण के काले सच पर अब हाईकोर्ट ने अपना चाबुक चला दिया है। शहर के जल और वायु को जहरीला बना रहे उद्योगों के खिलाफ हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान (Suo Motu) के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के 243 उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
अदालत ने इंदौर में बिना अनुमति चल रहे और खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे उद्योगों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि यह स्थिति मध्यप्रदेश जल और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद बोर्ड ने साफ कर दिया है कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि इन उद्योगों के बिजली कनेक्शन काटकर इन्हें स्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इंदौर जिले में कुल 5961 पंजीकृत उद्योग हैं, जिनमें से 1000 से अधिक उद्योग ऐसे पाए गए हैं जो प्रदूषण विभाग की एनओसी (NOC) के बिना ही चल रहे थे। इनमें स्टोन क्रशर, खनन और 'रेड-ऑरेंज' श्रेणी के बेहद खतरनाक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग शामिल हैं।
प्रदूषण के कारण इंदौर का पानी पहले ही दूषित हो चुका है, और अब हवा की गुणवत्ता (AQI) भी लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सतीश चौकसे के अनुसार, अवैध उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को सौंप दी गई है ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।
अब सबकी नजरें 9 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जहाँ महाधिवक्ता को बोर्ड की ओर से की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश करना होगा।
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