मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को मिले राष्ट्रीय जल पुरस्कार पर विवाद। कांग्रेस ने AI तस्वीरों से भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पुरस्कार का आधार वास्तविक कार्य और पोर्टल डेटा है।

राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते खंडवा कलेक्टर और सीईओ
खंडवा/भोपाल | स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को 'छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार' में प्रथम स्थान मिलने के साथ ही एक नया राजनीतिक विवाद जन्म ले चुका है। जहाँ एक ओर जिले ने जल संरक्षण में देशभर में शीर्ष स्थान पाकर 2 करोड़ रुपये का सम्मान प्राप्त किया, वहीं अब कांग्रेस ने इस उपलब्धि की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुरस्कार जीतने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित काल्पनिक तस्वीरों का सहारा लिया गया है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से सरकार और प्रशासन पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि खंडवा के अधिकारियों ने जल संरक्षण के नाम पर मात्र दो फीट के गड्ढों को एआई की मदद से विशाल कुओं में तब्दील कर दिया। पटवारी ने आरोप लगाया कि पोर्टल पर विकास कार्यों की फर्जी तस्वीरें अपलोड की गईं और राष्ट्रपति से पुरस्कार भी ले लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत में वहां केवल खाली मैदान हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "भाजपा राज में अब भ्रष्टाचार भी स्मार्ट हो गया है।"
इन आरोपों के बीच खंडवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नागार्जुन बी. गौड़ा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कार का चयन एक बेहद पारदर्शी और कड़ी प्रक्रिया के तहत हुआ है।
प्रशासन ने दो पोर्टल्स के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि जल संचय जन भागीदारी पोर्टल पर 1,29,046 वास्तविक जल संरक्षण कार्यों की सत्यापित फोटो अपलोड की गई थीं। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने इनकी न केवल जांच की, बल्कि यादृच्छिक (Random) भौतिक निरीक्षण भी किया। इसी डेटा के आधार पर पुरस्कार मिला है। कैच द रेन (CTR) पोर्टल केवल शैक्षणिक और प्रेरणात्मक उद्देश्य के लिए है। प्रशासन ने स्वीकार किया कि इस पोर्टल पर संभवतः दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी ने 21 AI-जनित तस्वीरें अपलोड कर दी थीं। इन तस्वीरों का उपयोग मुख्य पुरस्कार प्रक्रिया में नहीं किया गया है।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि "कैच द रेन" पोर्टल पर जिन व्यक्तियों ने ये एआई फोटो अपलोड की थीं, जिला प्रशासन उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन का दावा है कि शैक्षणिक उद्देश्यों वाली इन तस्वीरों को पुरस्कार के मूल्यांकन का आधार नहीं बनाया गया था।
बता दें कि नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में खंडवा को 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान में देशभर में पहला स्थान मिला है, वहीं जिले की कावेश्वर ग्राम पंचायत को सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में दूसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ है। फिलहाल, इस तकनीकी विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है।

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