नागौद तहसील स्थित कोर्दननाथ का गौमुख जल वैज्ञानिक परीक्षण में भी खरा उतरा है। पीएच 7.8 और टीडीएस 107 के साथ यह पानी पाचन और त्वचा रोगों में लाभकारी माना जा रहा है।
By: Yogesh Patel
Jan 02, 20268:23 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
नागौद तहसील के कोर्दननाथ की महिमा चहूंओर है। यहां से निकले वाले पानी को लेकर जितनी आस्था है उसके वैज्ञानिक आधार भी सामने आए है। इन्हीं आधारों के कारण यहां का पानी पाचन और त्वचा के रोगों के ठीक माना जा रहा है। आज राष्ट्रीय विज्ञान कथा दिवस के अवसर पर दो उदाहरणों से यह समझाने का प्रयास है कि कोर्दननाथ के जल का आध्यात्मिक तो है ही वैज्ञानिक आधार भी है। शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय व्यंकट वन के रसायन शास्त्र के शिक्षक डॉ. रामानुज पाठक बताते हैं कि कोर्दननाथ के पानी को लेकर विद्यालय की केमेस्ट्री लैब में टेस्ट किया गया था जिसमें उसका पीएच मान और टीडीएस जांचा गया। डॉ. पाठक ने बताया कि लैब में टेस्ट के दौरान पाया गया उसका पीएच मान 7.8 है जो दर्शाता हे कि हल्का क्षारीय है। इसी तरह शुद्धता और ख्रनिज संतुलन के हिसाब से इसका टीडीएस 107 रहा। जो दर्शाता है कि यह आदर्श है।
कथा-01: शरीर के सफेद दाग थे शादी में बाधक
कोर्दननाथ के जल एक बेटी के विवाह की बाधा दूर कर दी। यह सच्चाई रहिकवारा निवासी मोनम त्रिपाठी की है। उनके शरीर में कई जगह सफेद दाग हो गए थे जिसको लेकर उनके परिजन परेशान रहा करते थे। एक वैद्य की सलाह पर मोनम ने कोर्दननाथ का पानी न केवल पिया बल्कि नहाने धोने में उपयोग किया। इस तरह से वह 6 महीने में ठीक हो गई और अब वह सकुशल ससुराल में है।
कथा-02: गैस ने बिगाड़ रखी थी पूरे परिवार की सेहत
इन समय गैस के पीड़ित ज्यादातर घरों में है लेकिन कहते है कि कोर्दननाथ के जल में वो जादू है कि न केवल गैस में आराम मिलता है बल्कि पाचन शक्ति बढ़ाने में भी सहायक है। यह कथा कोनी के अमरनेन्द्र सिंह परिहार की है। 45 साल के अमरनेन्द्र रोजाना 50 लीटर पानी लेने 15 किलोमीटर दूर कोर्दननाथ जाते हैं। अमरनेन्द्र ने टेलीफोन पर चर्चा करते हुए बताया कि वह 5 महीने से ऐसा कर रहे हैं। जिससे न केवल गैस में राहत है बल्कि पाचन शक्ति भी ठीक हुई है।
जाहिर है पहाड़ से निकला पानी है तो सल्फर भी शामिल है जिस कारण त्वचा के रोगों में आराम मिलता है। इसके अलावा पहाड़ी पानी में मिनरल्स होते हैं जो पाचन शक्ति बढ़ाने का कार्य करते हैं। बाकी तो आपको पता है कि धार्मिक स्थलों से निकलने वाले जल का आध्यात्मिक महत्व होता है।
अंजनी कुमार त्रिपाठी, पूर्व संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा
कोर्दननाथ क्या जहां भी ऐसे आस्था के केन्द्र पहाड़ों के आसपास है वहां के जल में सल्फर होता ही है यह तत्व त्वचा के रोगों के इलाज में सार्थक है। सुमेद्य सल्फर नाम का एक मलहम आता है उसका पीला भाग सल्फर ही है। यह सबसे सार्थक दवा है त्वचा के लिए।
डॉ. प्रदीप मिश्रा, पूर्व विभागाध्यक्ष रसायन शास्त्र, स्वशासी महाविद्यालय
कर्दमेश्वर नाथ (कोर्दननाथ) का गौमुख जल केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक हाइड्रो-केमिकल प्रयोगशाला है, जहां भूविज्ञान, रसायन विज्ञान और मानव शरीर विज्ञान एक साथ प्रवाहित होते हैं। पीएच 7.8 और टीडीएस 107 जैसे तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रकृति कई बार वह समाधान देती है, जिसे हम चमत्कार कहकर छोड़ देते हैं।
डॉ. रामानुज पाठक, उच्च माध्यमिक शिक्षक, व्यंकट वन