थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले की जांच तेज हो गई है। मानवाधिकार आयोग की टीम ने सतना और रीवा में दस्तावेज खंगालने के साथ कलेक्टर-एसपी से चर्चा कर निलंबित अधिकारियों के बयान दर्ज किए।
By: Yogesh Patel
Jan 02, 20268:37 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित ब्लड चढ़ाने के मामले में जांच सतना से होते हुए रीवा तक पहुंच गई है। पिछले तीन दिनों से मामले की जांच कर रही मानवाधिकार आयोग की टीम ने संक्रमित ब्लड चढ़ाने के मामले में सतना और रीवा में इससे जुड़े जहां दस्तावेज खंगाले वहीं साल के पहले दिन मामले में अब तक प्रशासनिक स्तर पर की गई तमाम कार्रवाईयों की जानकारी कलेक्टर और एसपी से ली।
दस्तावेज खंगालने और जानकारियां लेने के अलावा मानवाधिकार आयोग की टीम ने संक्रमित ब्लड चढ़ाने के मामले में निलंबित चल रहे ब्लड बैंक प्रभारी, लैब टैक्नीशियन, नर्सिंग आफीसर व एचआईवी नोडल के बयान भी दर्ज किए। इन्वेस्टिगेशन डिवीजन के निरीक्षकों रोहित सिंह एवं संजय कुमार द्वारा ब्लड बैंक से जुड़े कई स्टाफों के स्थानीय सर्किट हाउस में भी बयान के लिए बुलाया गया था। बताया जाता है कि टीम शुक्रवार को अपनी जांच पूरी कर दिल्ली के लिए रवाना होगी।
अब तक तीन निलंबित, सामने नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए थैलीसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला उजागर होने के बाद जिला स्तरीय तीन सदस्यीय टीम एवं राज्य स्तरीय सात सदस्यीय टीम को जांच के निर्देश दिए गए थे। मामले के तूल पकड़ने के बाद राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम जांच करने जिला अस्पताल पहुंची। राज्य स्तरीय टीम में शामिल आयुष्मान भारत सीईओ योगेश भरसट की प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डा. देवेन्द्र सिंह पटेल एवं लैब टेक्नीशियन रामभाई त्रिपाठी एवं नंदलाल पांडेय को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद नाको एवं मानवाधिकार आयोग की टीम द्वारा जांच की गई। मामला अभी भी कागजों में ही सिमटा हुआ है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हुए किसी भी उच्च अधिकारी का बयान सामने नहीं आया है।
सुबह मंगाए रिकार्ड, शाम को भ्रमण
मिली जानकारी के अनुसार इन्वेस्टिगेशन डिवीजन के इंस्पेक्टरों द्वारा गुरुवार की सुबह ब्लड बैंक, आईसीटीसी एवं एआरटी सेंटर से पीड़ितों के दस्तावेजों को सर्किट हाउस में मंगाया गया। दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद अधिकारीयों द्वारा शाम को जिला अस्पताल का भ्रमण किया गया। इससे पहले ये दोनों निरीक्षकों ने दोपहर में करीब ढाई बजे एसपी हंसराज सिंह से मुलाकात कर करीब आधा घंटा तक चर्चा की। इसके बाद कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से शाम चार बजे मुलाकात कर करीब आधा घंटे तक पीड़ितों के बिषय पर चर्चा की गई। जानकारी के मुताबिक शाम 5 बजे टीम द्वारा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक, आईसीटीसी एवं एआरटी का भ्रमण कर पूंछताक्ष की गई। अधिकारीयों के द्वारा निलंबित ब्लड बैंक अधिकारी डॉ. देवेंद्र पटेल को भी जिला अस्पताल में बयान के लिए बुलाया गया था। मौके पर ब्लड बैंक अधिकारी के बयान दर्ज करने के बाद एचआईवी नोडल डॉ. पूजा गुप्ता के भी बयान कलमबद्ध किए।
आईसीटीसी सेंटर का फिजिकल वेरीफिकेशन
इसके बाद ब्लड बैंक एवं आईसीटीसी सेंटर का भ्रमण कर फिजिकल वेरीफिकेशन भी किया गया। इस दौरान जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह भी मौजूद रहे। कुछ सूत्रों ने बताया कि जिला अस्पताल से जाने के बाद टीम ने ब्लड बैंक के कुछ स्टाफ एवं निलंबित लैब टेकनीशियनों को पूंछताक्ष करने सर्किट हाउस भी बुलाया था। सूत्रों की मानें तो मानवाधिकार आयोग के निरीक्षकों ने चार दिनों में ही अपनी जांच पूरी कर ली है अब इसे आयोग के समक्ष रखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों के भी बयान दर्ज
दिल्ली से आई मानवाधिकार आयोग की टीम द्वारा बीते तीन दिनों में सभी संक्रमित 4 बच्चों के परिजनों को शहर से बाहर बुलाकर बयान दर्ज किए गए। छत्तीसगढ़ का बच्चा जो कि रीवा मेडिकल कॉलेज में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान संक्रमित हुआ था, उसकी जांच रिपोर्ट खगालने टीम को रीवा मेडिकल कॉलेज भी जाना पड़ा। इसके बाद जिला अस्पताल का भ्रमण कर एचआईवी नोडल अधिकारी, आईसीटीसी के स्टाफ, निलंबित ब्लड बैंक अधिकारी एवं लैब टेक्नीशियनों के बयान कलमबद्ध किए गए। सूत्रों ने बताया कि आयोग की टीम ने जांच प्रक्रिया पूरी कर ली है। पीड़ितों को आर्थिक सहायता दिलाने हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है।