मैहर जिला बनने के बावजूद यहां का जिला अस्पताल सुविधाओं से वंचित है। दिव्यांग मेडिकल बोर्ड की साप्ताहिक बैठक बंद कर मासिक कर दी गई है, जिससे सैकड़ों दिव्यांगों और छात्रों को योजनाओं व शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।

हाइलाइट्स
मैहर, स्टार समाचार वेब
प्रदेश सरकार द्वारा मैहर को जिला तो बना दिया गया, मगर अब तक मैहर जिला चिकित्सालय में ना तो सिविल सर्जन बैठे और ना ही यहां पर सीएमएचओ का पद सृजन किया गया। यानी सारा नियंत्रण सतना सीएमएचओ के द्वारा किया जा रहा है, जबकि मैहर को जिला बने दो वर्ष होने को है किंतु मैहर अस्पताल को जिला के अनुसार नए पद अभी तक सृजित नहीं किए गए जो चिंता का विषय है। मैहर जिला बनने के बाद रामनगर और अमरपाटन तहसील का समूचा एरिया मैहर में समाहित कर दिया गया, पर व्यवस्थाएं जस की तस ही हैं।
आंदोलन के मूड में हैं लोग
देखने में आया है कि मैहर में जिला मेडिकल टीम के महीने में केवल एक दिन के बैठने से काफी भीड़ होने के चलते अधिकांश दिव्यांगों का प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना तो पड़ता है, साथ ही शासन की कई जनकल्याणकारी योजनाओं से भी उन्हें वंचित होना पड़ रहा है, जबकि विद्यार्थियों का इस समय नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ है और दिव्यांग छात्र-छात्राओं को विद्यालय में विकलांगता का प्रमाण पत्र देना पड़ता है। अगर अविलंब प्रत्येक गुरुवार को मैहर में जिला मेडिकल बोर्ड के बैठने के आदेश जारी नहीं किए गए तो इसके लिए मैहर में वृहद आंदोलन किया जाएगा। जिसकी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।
दिव्यांगों को हो रही परेशानी
मैहर को जिले का तमगा मिलने के कारण सिविल अस्पताल मैहर में प्रत्येक गुरुवार को पांच डॉक्टरों की जिला मेडिकल बोर्ड बैठने लगी थी जिससे कि लोगों को काफी लाभ मिलता था। जिले भर से आए हुए दिव्यांगों एवं छात्र-छात्राओं का आसानी से प्रमाण पत्र बन जाता था, मगर सीएमएचओ सतना द्वारा डॉक्टरों की कमी का हवाला बताकर अब माह में केवल एक बार यानी महीने के अंतिम गुरुवार को जिला मेडिकल बोर्ड बेठने का निर्णय लिया है जिस वजह से मैहर जिले की आम जनता में काफी निराशा और नाराजगी देखी जा रही है।

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