सतना के मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी पर मरीज ने लापरवाही और बाहर से दवाएं खरीदवाने का आरोप लगाया। शिकायत एसडीओ तक पहुंची, वहीं विधायक भी स्वास्थ्य सेवाओं की अव्यवस्था को लेकर प्रभारी मंत्री को पत्र लिख चुके हैं।
By: Star News
हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
एक ओर सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए जिन्हें जिम्मेदारी दी गई है कि उनकी कर्त्तव्य विमुखता सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है। खासकर आदिवासी बाहुल्य मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना जरूरी है, वहां सबसे अधिक लापरवाही बरती जा रही है। आए दिन सामने आने वाले लापरवाही के मामलों के बीच एक और ऐसा ही मामला सामने आया है जिसकी शिकायत अनुविभागीय अधिकारी से की गई है।
इलाज के लिए कमरे में बुलाया बाहर से दवा खरीदवाया
अनुविभागीय अधिकारी को की गई शिकायत में तालाब टोला मझगवां निवासी श्रीकांत त्रिपाठी ने बताया है कि मझगवां अस्पताल में मरीजों को सही उपचार नहीं दिया जा रहा है और बदसलूकी की जाती है। श्रीकांत के अनुसार वह शुक्रवार को इलाज कराने पहुंचा था जहां डा. रूपेश सोनी ने दस मिनट बाद आने के लिए कहा गया। शिकायती पत्र के अनुसार 10 मिनट बाद पहुंचने पर बदजुबानी की गई तत्पश्चात जांच कराने के लिए कहा गया। जांच रिपोर्ट लेकर आने पर कमरे में आकर दिखाने को कहा गया।श्रीकांत ने जब विरोध जताया और अस्पताल में ही देखने की जिद पर अड़ा रहा तब अस्पताल में पर्चा बनाया गया।श्रीकांत के अनुसार कुछ दवाइयां अस्पताल से दी गर्इं जबकि कुछ दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए कहा गया। शिकायती पत्र में श्रीकांत ने सवाल उठाया कि जब गरीब को सरकार से इलाज, जांच व दवा निशुल्क दी जा रही है तो बाहर से जांच व दवाएं क्यों?
जब मामले ने लिया नाटकीय मोड़
हालंकि इस मामले ने तब नाटकीय मोड़ ले लिया जब श्रीकांत की गुहार पर कुछ मीडियाकर्मी सामुदायिक स्वा्स्थ्य केंद्र पहुंचकर शिकायतकर्ता का पक्ष जानने लगे। यह बात बीएमओ डा. रूपेश सोनी को इस कदर नागवार गुजरी कि उन्होने थाने में पहुंचकर शिकायत कर दी। उधर श्रीकांत पर भी दबाव बनाकर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की गई जिसमें कुछ स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने भी अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि विपक्षी दल के ऐ जनप्रतिनिधि द्वारा श्रीकांत को इस बात के लिए राजी करने का प्रयास किया गया कि लगाए गए आरोप वापस ले, ताकि बीएमओ द्वारा की गई थाने में शिकायत पुष्ट हो सके।
विधायक भी लिख चुके प्रभारी मंत्री को चिट्ठी
मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बेपटरी हो चुकी चिकित्सा व्यवस्था के संबंध में चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र भी लिख चुके है। विधायक ने प्रभारी मंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि मझगवां बीएमओ डा. रूपेश सोनी मझगवां में स्टाफ क्वार्टर आवंटित होने के बावजूद मुख्यालय में न रहकर रोजाना आवागमन करते हैं जिससे आदिवासी बाहुल्य पहाड़ी क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। हालंकि विधायक द्वारा पत्र लिखने के 3 माह बीतने के बाद भी डा. सोनी मझगवां में डटे हुए हैं। इस मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि सत्तापक्ष के विधायक बीएमओ को हटाने के लिए पत्र लिख रहे हैं जबकि विपक्षी दल के नेता उनकी ढाल बनकर डैमेज कंट्रोल कर रहे हैं।