प्रदेश में मनरेगा मजदूरी के 100 करोड़ से अधिक बकाया, विंध्य के जिलों में करोड़ों अटके, होली से पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर।
By: Yogesh Patel
Feb 21, 202612:47 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत मजदूरों का हजारों लाख रुपये का भुगतान लंबित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश स्तर पर अकुशल मजदूरी के 7219 लाख रुपये तथा कुशल मजदूरी के 3258 लाख रुपये का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। यह तब है जब होली को गिनती के दिन बचे हुए हैं।
जिला स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। सतना-मैहर जिले में अकुशल मजदूरी के 133 लाख रुपये और कुशल मजदूरी के 15 लाख रुपये बकाया हैं। सीधी जिले में अकुशल मजदूरी 92.15 लाख रुपये तथा कुशल मजदूरी 7.65 लाख रुपये लंबित है। रीवा-मऊगंज में अकुशल मजदूरी 445.56 लाख रुपये और कुशल मजदूरी 8.58 लाख रुपये अटकी हुई है। सिंगरौली में अकुशल मजदूरी 102.98 लाख रुपये तथा कुशल मजदूरी 37.53 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भुगतान संकट व्यापक और बहुस्तरीय है। होली जैसे प्रमुख त्यौहार से ठीक पहले यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है। ग्रामीण परिवार त्यौहार पर आवश्यक खरीदारी और पारिवारिक जरूरतों के लिए इसी मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। भुगतान न मिलने से बाजार भी ग्राहकी भी फीकी है।
सतना-मैहर की जनपदों का हाल
सतना और मैहर की आठ जनपद पंचायतों में अकुशल और कुशल मजदूरी मिलाकर करीब 135 लाख रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। इससे हजारों मजदूर परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सबसे ज्यादा बकाया मझगवां में है, जहां अकुशल मजदूरी के 43.18 लाख और कुशल मजदूरी के 1.29 लाख रुपये अटके हैं। अमरपाटन में अकुशल 32.3 लाख और कुशल 0.21 लाख लंबित हैं। रामपुर बघेलान में अकुशल 24.68 लाख और कुशल 1.16 लाख का भुगतान बाकी है। सतना जनपद में अकुशल 15.39 लाख और कुशल 1.29 लाख रुपये अटके हैं, जबकि उचेहरा में अकुशल 7.8 लाख और कुशल 1.1 लाख लंबित हैं। मैहर में अकुशल 5.2 लाख और कुशल 1.44 लाख, नागौद में अकुशल 3.46 लाख और कुशल 5.72 लाख, तथा रामनगर में अकुशल 0.93 लाख और कुशल 2.28 लाख रुपये का भुगतान शेष है।
मजदूरों में असंतोष बढ़ा
मजदूरों में असंतोष बढ़ रहा है और कई स्थानों पर प्रशासन से शीघ्र भुगतान की मांग की जा रही है। यदि समय रहते बकाया राशि जारी नहीं की गई तो यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को त्वरित फंड रिलीज, भुगतान ट्रैकिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि योजना का उद्देश्य सुरक्षित रहे और ग्रामीण विश्वास बहाल हो सके।
पहले भुगतान नहीं तो आंदोलन
भारतीय किसान-मजदूर महासंघ के युवा नेता सुभाष पांडेय ने कहा, सरकार कागजों में रोजगार गारंटी की बात करती है, लेकिन मजदूरी की गारंटी नहीं दे पा रही। मजदूर दिनभर धूप में पसीना बहाते हैं और महीनों तक भुगतान के लिए चक्कर लगाते हैं। यह शोषण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि होली से पहले भुगतान जारी नहीं किया गया तो जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।