सतना जिले के नागौद जनपद की रहिकवारा ग्राम पंचायत में पीएम आवास योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। सरपंच की पत्नी, उपसरपंच स्वयं और सचिव के भाई को योजना का लाभ मिलने पर सवाल उठे हैं। जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में यह मुद्दा गरमाया और अब जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। सीईओ जिला पंचायत संजना जैन के निर्देश पर यह टीम 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के नागौद जनपद की रहिकवारा ग्राम पंचायत में हुए पीएम आवास घोटाले में वर्तमान सरपंच, उपसरपंच एवं सचिव की क्या भूमिका है, इसकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है और यह टीम अगले 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। यह मामला जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में उठने के बाद सीईओ जिला पंचायत ने टीम का गठन किया है। जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी व पीएम आवास प्रभारी गौरव शर्मा की अगुवाई में बनाई गई टीम में जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू,एक स्थानीय जिला पंचायत सदस्य, नागौद ब्लॉक क्वार्डिनेटर एवं वित्त शाखा से जुड़े एक कर्मचारी को शामिल किया गया है। यह टीम इस बात की जांच करेगी कि इनके परिजनों के खाते में पीएम आवास योजना का पैसा कैसे गया, जबकि ये हितग्राही नहीं थे। गौरतलब है कि समिति की बैठक में जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेन्द्र सिंह ने रहिकवारा में हुए पीएम आवास घोटले में वर्तमान सरपंच, सचिव और उपसरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान सरपंच ने अपनी पत्नी, उपसरपंच ने स्वयं एवं सचिव ने अपने भाई का योजना का लाभ दिलाया जबकि वे इसके हितग्राही नहीं थे, इसकी जांच होनी चाहिए कि इनके खाते में पैसा कैसे आया?
लगभग सात माह बाद शुक्रवार को आयोजित सामान्य प्रशाान समिति की बैठक निर्धारित समय से लगभग एक घंटे की देरी से शुरू हुई वजह यह रही कि सम्बंधित विभागों के प्रमुख समय से बैठक में नहीं आए बल्कि सीईओ जिला पंचायत के बुलाने के बाद पौने एक बजे के करीब पहुंचे।
पुराने अधिकारियों का तबादला हो गया, इसलिए नहीं लाए कार्रवाई
जिला पंचायत की बैठकें पूरी तरह से मजाक बन चुकी हैं, समितियों से जुड़े विभाग प्रमुख बैठकों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं,तभी तो जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में अधिकारी सीईओं के बुलाने पर पहुंचे तो जरूर लेकिन किसी भी स्थाई समिति की बैठक का अनुमोदन नहीं हुआ। विभाग प्रमुख अपने साथ पिछली कार्रवाई नहीं लेकर आए थे। जनवरी में हुई सामान्य प्रशासन समिति की हुई बैठक के बाद अब तक सहकारिता, महिला बाल विकास, वन समिति, संचार संकर्म एवं शिक्षा समिति की बैठक हो चुकी हैं। इनमें से किसी भी बैठक की कार्रवाई लेकर संबंधित विभाग प्रमुख नहीं पहुंचे थे। इसके पीछे उनका तर्क था कि इन विभागों से जुड़े पूर्व के अधिकारियों का स्थानांतरण हो गया है। विभाग प्रमुखों द्वारा बताया गया कि अगली बैठक में कार्रवाई लेकर आएंगे जिसका सदस्यों ने विरोध करते हुए कहा कि यह हर बार का बहाना हो गया है।
ईई के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव
सामान्य प्रशासन समिति की बैठक के दौरान आरईएस के तात्कालीन कार्यपालन यंत्री अश्वनी जायसवाल के खिलाफ पंचायत की धाराओं के तहत सदन को गुमराह करने की कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। दरअसल उन्होंने सदन को बताया था कि पंचायत भवन और स्वराज भवन अलग- अलग हैं, जबकि शुक्रवार की बैठक में जानकारी दी गई कि यह दोनों एक ही हैं और इनके नाम अलग- अलग हैं।
अमृत सरोवर की जांच पर भी सवाल
बैठक के दौरान कई सदस्यों को पिछली बैठकों का पालन प्रतिवेदन मौके पर दिए जाने पर भी नाराजगी जाहिर की गई, साथ ही अमृत सरोवर योजना के तहत भरहुत में बने तालाब की जांच के लिए भोपाल को पत्र लिखने का भी सदस्यों ने विरोध करते हुए कहा कि इस मामले की जांच स्थानीय स्तर पर कराई जानी थी जिसमें क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य और तकनीकी अधिकारी को शामिल किया जाना था, फिर इसकी जांच को भोपाल से कराए जाने को लेकर आखिर पत्र क्यों लिखा गया।
सचिवों के तबादले में मनमानी
बीते दिनों हुए पंचायत सचिवों के तबादलों में तबादला नीति को दरकिनार मनमानी तरीके से स्थानांतरण किए जाने का आरोप सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में जिला पंचायत सदस्यों ने लगाया। सदस्यों का आरोप था कि मनमानी तरीके से सचिवों के तबादले किए गए जिसमें दुर्भावनावश दिव्यांगों और ऐसे सचिवों का भी तबादला कर दिया जिनका एक साल पहले तबादला हुआ था।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष रामखेलावन कोल, उपाध्यक्ष सुष्मिता पंकज सिंह परिहार, सीईओ जिला पंचायत संजना जैन, संचार संकर्म समिति के सभापति ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू, रमाकांत पयासी, तारा विजय पटेल, हरीश कांत त्रिपाठी एवं सुभाष बुनकर के अलावा सम्बंधित शाखाओं के अधिकारी- कर्मचारी मौजूद रहे।


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