रीवा में कृषि विभाग के अधिकारी ने अपनी सेवा पुस्तिका में हेरफेर किया। कोर्ट ने 3 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई, विभाग ने सेवा से पृथक किया।
By: Star News
Jan 20, 20264:08 PM
हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
किसान कल्याण एवं कृषि विकास कार्यालय में पदस्थ एक अधिकारी ने अपनी ही सेवा पुस्तिका खुद सुधार ली। सेवा पुस्तिका में दर्ज दंड में हेरफेर कर दिया। थाने में मामला दर्ज हुआ। कोर्ट ने 3 वर्ष की सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। इस मामले में किसान कल्याण एवं कृषि विकास संचालनालय ने भी कार्रवाई की है। अधिकारी को सेवा से ही पृथक करने का आदेश जारी कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार अशोक कुमार त्रिपाठी सहायक भूमि संरक्षण सर्वे अधिकारी कार्यालय सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी उप संभाग रीवा में पदस्थ रहे। इसके खिलाफ तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश जिला रीवा ने 23 जुलाई 2025 को अपराध क्रमांक 593/2026 में सजा सुनाई थी। न्यायालय ने अशोक कुमार त्रिपाठी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास व अर्थदंड से दंडित किया था। न्यायालय से सजा मिलने के बाद संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास ने अशोक कुमार त्रिपाठी को 23 जुलाई 2025 से पद से पदच्युत करने की दीर्घ शास्ति से दंडित करने का आदेश जारी किया है।
खुद की सेवा पुस्तिका में कर दिया था सुधार
आदेश में कहा गया है कि अशोक कुमार त्रिपाठी सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी रीवा की इकाई हनुमना के सर्वेयर अभियुक्त की विभागीय जांच होने पर संभागीय भूमि संरक्षण अधिकारी वेन गंगा अयाकट संभाग 6 सिवनी के आदेश क्रमांक/लेखा/ 93/ 453-57 दिनांक 27 मार्च 1993 के द्वारा 2 हजार 605 रुपए शासकीय राशि के गबन किए जाने पर दो वेतन वृद्धियां संयोजनशील की गर्इं थी। रीवा जिला में स्थानांतरित होने पर अशोक त्रिपाठी को स्थापना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने सेवा पुस्तिका में दर्ज संयोजनशील से छेड़छाड़ की। उसे असंयोजनशील कर दिया। इसकी शिकायत हुई। नोटिस जारी की गई। इसके बाद जेडी के निर्देश पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया। अशोक कुमार त्रिपाठी के खिलाफ सिविल लाइन थाना में अपराध क्रमांक 593/2016 के तहत धारा 409/34, 420/34, 467, 468, 471/34 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसी मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 23 जुलाई 2025 को अशोक कुमार त्रिपाठी के खिलाफ फैसला सुनाया। अशोक कुमार त्रिपाठी को 3वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई और 5 से 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित भी किया गया।